रवि पुष्य नक्षत्र: दिवाली से पहले बन रहा दुर्लभ महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, खरीदारी और पूजा विधि

Anand Kumar
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नई दिल्ली / धर्म डेस्क:

दीपावली के महापर्व से ठीक पहले आने वाला रवि पुष्य नक्षत्र सनातन परंपरा में बेहद शुभ, कल्याणकारी और अक्षय फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है। जब यह नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है। इस दिन किए गए मांगलिक कार्य, निवेश और खरीदारी जीवन में दीर्घकालिक सुख-समृद्धि लाते हैं।

रवि पुष्य नक्षत्र का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देव गुरु बृहस्पति हैं और इसके स्वामी शनि देव हैं। रविवार के दिन इस नक्षत्र का आना सूर्य देव की सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है।

  • स्थायित्व का प्रतीक: इस योग में खरीदी गई कोई भी वस्तु जैसे भूमि, भवन, वाहन अथवा आभूषण लंबे समय तक लाभ प्रदान करते हैं।
  • अक्षय फल: इस दिन प्रारंभ किया गया व्यापारिक कार्य अथवा नया उद्यम निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

रवि पुष्य नक्षत्र में क्या खरीदना सबसे शुभ?

रवि पुष्य नक्षत्र पर धनतेरस और दीपावली की तरह ही खरीदारी की विशेष परंपरा है:

  1. सोना और चांदी: इस दिन स्वर्ण या रजत आभूषण, सिक्के अथवा श्रीयंत्र खरीदना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  2. भूमि, भवन और गृह प्रवेश: नए घर की नींव रखने, फ्लैट बुक करने या नए गृह में प्रवेश के लिए यह दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
  3. वाहन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स: नई कार, बाइक या व्यावसायिक मशीनरी की खरीदारी के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।
  4. बही-खाते (चौपड़ा): व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए व्यापारिक वर्ष के लिए बही-खाते खरीदते हैं और कुमकुम से स्वास्तिक बनाकर पूजन करते हैं।

रवि पुष्य योग: पूजन विधि एवं नियम

इस पावन दिन पर सूर्य देव और माता महालक्ष्मी की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करें:

  • सूर्य देव को अर्घ्य: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर उदित होते भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
  • गायत्री मंत्र का जाप: सूर्य देव के समक्ष गायत्री मंत्र या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ का कम से कम 108 बार जप करें।
  • लक्ष्मी-गणेश पूजन: संध्याकाल में शुद्ध घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश और देवी महालक्ष्मी का विधिवत पूजन करें। उन्हें कमल गट्टे, पीले पुष्प, खीर और फल अर्पित करें।
  • कनकधारा एवं श्री सूक्त पाठ: आर्थिक संकटों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन कनकधारा स्तोत्र अथवा श्री सूक्त का पाठ अत्यंत प्रभावी माना गया है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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