JPSC-JSSC मामले : ख्यांग्ते की बेल पर फैसला सुरक्षित, अभय तिवारी पर 8 सितंबर को बहस; महिला सुपरवाइजर केस में आदेश पर रोक

Anand Kumar
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रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े मामलों में बुधवार को अदालतों से कई अहम अपडेट सामने आए। JPSC परीक्षा कथित गड़बड़ी मामले में पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं मामले के कथित किंगपिन अभय तिवारी की बेल याचिका पर CID ने अपना पक्ष रखा है और अब 8 सितंबर को उनकी ओर से बहस होगी। दूसरी ओर JSSC की महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है।

ख्यांग्ते की जमानत पर फैसला सुरक्षित, 5 सितंबर को आदेश

JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर CID की विशेष अदालत में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत इस मामले में 5 सितंबर को आदेश सुना सकती है।

ख्यांग्ते की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और छापेमारी के दौरान भी उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। उनकी गिरफ्तारी को भी चुनौती दी गई।

वहीं CID ने ख्यांग्ते की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा आयोजन का काम TDPL को देने में उनकी भूमिका थी और एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरते जाने की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कार्रवाई नहीं की। CID ने अदालत में पहले ही केस डायरी पेश की थी।

CID ने इस मामले में 10 अगस्त को एल ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के आरोप के मुताबिक, उन पर TDPL से कथित तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप है। परीक्षा में अनियमितता को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है और इस मामले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है।

अभय तिवारी की बेल पर CID की दलील पूरी, 8 सितंबर को बचाव पक्ष रखेगा पक्ष

इसी मामले में जेल में बंद अभय तिवारी की जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में CID ने अपना पक्ष रखा। अब 8 सितंबर को अभय तिवारी की ओर से बहस की जाएगी।

अभय तिवारी को इस मामले में कथित किंगपिन बताया गया है। वह TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर रह चुके हैं। उन पर अपने रिश्तेदारों के अलावा अन्य अभ्यर्थियों से पैसे लेकर नौकरी दिलाने का आरोप है।

CID की जांच में अभय तिवारी के बयान का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, उनके स्वीकारोक्ति बयान में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की कथित भूमिका का जिक्र है और TDPL को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयन किए जाने में ख्यांग्ते की भूमिका बताए जाने की बात सामने आई है।

महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में एकल पीठ के आदेश पर रोक

JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले से अलग JSSC महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में भी बुधवार को हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण आदेश आया। JSSC की अपील पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के JSSC के फैसले को निरस्त कर दिया गया था।

दरअसल, दस्तावेज सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। इसके खिलाफ दायर याचिका पर एकल पीठ ने JSSC का फैसला निरस्त करते हुए संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। JSSC ने इस आदेश को डबल बेंच में चुनौती दी थी।

महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। एकल पीठ के समक्ष अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी गई थी कि विज्ञापन और नियुक्ति नियमावली में समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और गृह विज्ञान में तीन वर्षीय ऑनर्स डिग्री को अनिवार्य नहीं किया गया था। उनका कहना था कि संबंधित विषयों के साथ स्नातक होना पर्याप्त था।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

तीनों मामलों में अदालत के अगले कदम पर नजर

इस तरह JPSC-JSSC से जुड़े मामलों में बुधवार का दिन कानूनी रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा। एक ओर JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत पर 5 सितंबर को फैसला आने की संभावना है, तो दूसरी ओर कथित किंगपिन अभय तिवारी की बेल याचिका पर 8 सितंबर को बचाव पक्ष की दलील सामने आएगी। वहीं महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में एकल पीठ के आदेश पर रोक के बाद अब मामला डबल बेंच के समक्ष आगे बढ़ेगा।

इन अदालती कार्यवाहियों का असर झारखंड में भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े विवादों पर पड़ सकता है। खासकर JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में अब जांच एजेंसी की कार्रवाई और आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर अदालत के रुख पर नजर रहेगी।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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