रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की अनुशंसा के आलोक में JPSC सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद के त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया है।
- पांच घंटे से अधिक चली सरकार और छात्रों की बैठक
- JSSC CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर फंसा पेच
- छात्रों ने कहा- CGL रद्द नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा
- सरकार के 98 प्रतिशत मांगें मानने के दावे पर छात्रों को आपत्ति
- 14वीं JPSC परीक्षा रद्द, लेकिन छात्रों की मांगें इससे आगे
- JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
- अब 10 अगस्त के विधानसभा मार्च पर नजर
तीन सदस्यों के इस्तीफे की यह घटना ऐसे समय हुई है, जब JPSC-JSSC परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
पांच घंटे से अधिक चली सरकार और छात्रों की बैठक
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर सरकार और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे से अधिक समय तक बैठक चली। तीन चरणों में हुई बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी।
सरकार का दावा है कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, लेकिन छात्र नेता इस दावे से सहमत नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी कुछ प्रमुख और मूल मांगों पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
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JSSC CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर फंसा पेच
सरकार और छात्रों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर है।
सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि CGL परीक्षा को रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। उनके मुताबिक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद परीक्षा आयोजित की गई है। ऐसे में राज्य सरकार अपने स्तर से परीक्षा को रद्द नहीं कर सकती।
मंत्री ने यह भी कहा कि CGL के माध्यम से नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों की नियुक्ति को भी सरकार अपने स्तर पर रद्द नहीं कर सकती।
हालांकि, सरकार ने कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करने का विकल्प खुला रखा है।
छात्रों ने कहा- CGL रद्द नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा
वहीं छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पूरी नहीं हुई है, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनकी सभी प्रमुख मांगों पर फैसला नहीं लिया है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से केवल 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है, जबकि अन्य परीक्षाओं को लेकर उठाए गए सवाल और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग अभी भी लंबित है।
छात्र नेताओं के मुताबिक जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन वापस लेने का सवाल नहीं है।
सरकार के 98 प्रतिशत मांगें मानने के दावे पर छात्रों को आपत्ति
इस पूरे विवाद में सरकार और छात्रों के दावों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
सरकार कह रही है कि 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली गई हैं।
वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि जिन मांगों को वे सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं, उन पर अभी कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है।
यानी विवाद अब केवल मांगों को मानने या नहीं मानने का नहीं है, बल्कि यह भी सवाल है कि—
सरकार जिन 98 प्रतिशत मांगों को पूरा करने का दावा कर रही है, वे कौन-कौन सी हैं?
और दूसरी तरफ—
छात्र जिन मांगों को अभी भी लंबित बता रहे हैं, उनमें से कितनी मांगें सरकार ने स्वीकार नहीं की हैं?
यही अंतर दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की सबसे बड़ी वजह बनता दिखाई दे रहा है।
14वीं JPSC परीक्षा रद्द, लेकिन छात्रों की मांगें इससे आगे
सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। लेकिन छात्र इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। वे JPSC-JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और अन्य परीक्षाओं को लेकर भी स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
छात्रों का कहना है कि जब तक पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक केवल एक परीक्षा रद्द करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की अनुशंसा के आलोक में स्वीकार कर लिया।
छात्र आंदोलन के बीच आयोग के तीन सदस्यों के एक साथ इस्तीफे से JPSC की कार्यप्रणाली और आगामी भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में तीनों सदस्यों के इस्तीफे के व्यक्तिगत कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं है। इसलिए उनके इस्तीफे को सीधे तौर पर परीक्षा विवाद से जोड़ना उचित नहीं होगा।
अब 10 अगस्त के विधानसभा मार्च पर नजर
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं होने के कारण अब सबकी नजरें 10 अगस्त के विधानसभा मार्च पर टिकी हैं।
छात्र संगठनों ने कहा है कि वे विधानसभा मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकालेंगे। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ करना नहीं है।
वहीं सरकार और प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि प्रस्तावित मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए छात्रों की मांगों को लेकर संवाद का रास्ता खुला रखा जाए।
सरकार और छात्रों के बीच असली गतिरोध कहां है?
पूरे घटनाक्रम को देखें तो फिलहाल तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देते हैं—
पहला: क्या सरकार और छात्रों के बीच CGL परीक्षा को लेकर कोई ऐसा रास्ता निकलेगा, जो दोनों पक्षों को स्वीकार हो?
दूसरा: सरकार जिन 98 प्रतिशत मांगों को मानने का दावा कर रही है, उनका लिखित और बिंदुवार विवरण कब सामने आएगा?
तीसरा: क्या 10 अगस्त के विधानसभा मार्च से पहले सरकार छात्रों की बाकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित आश्वासन देगी?
फिलहाल JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे, सरकार-छात्र वार्ता की विफलता और 10 अगस्त के विधानसभा मार्च ने झारखंड के भर्ती परीक्षा विवाद को एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर ला दिया है।
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