झारखंड में नगर निगम चुनाव 2026: एक नजर पूरी चुनावी तैयारी और शेड्यूल पर
Ranchi : झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों में जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और उपायुक्तों ने प्रेस वार्ताओं के जरिए चुनाव कार्यक्रम, मतदान व्यवस्था, खर्च सीमा और सुरक्षा प्रबंधों की विस्तृत जानकारी साझा की है। अधिसूचना जारी होते ही संबंधित नगर निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
देवघर: एक चरण में होगा नगर निगम चुनाव, खर्च सीमा तय
देवघर में नगर निगम चुनाव को लेकर समाहरणालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि चुनाव को पारदर्शी, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नगर निगम चुनाव एक ही चरण में कराए जाएंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि महापौर पद के प्रत्याशियों के लिए अधिकतम 15 लाख रुपये और वार्ड पार्षद पद के लिए 3 लाख रुपये की व्यय सीमा तय की गई है। सभी प्रत्याशियों को खर्च सीमा का सख्ती से पालन करना होगा, उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी।
देवघर नगर निगम क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों का चयन कर लिया गया है और आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। वज्र गृह और मतगणना केंद्र देवघर कॉलेज परिसर स्थित जिला राइफल शूटिंग सेंटर में बनाया गया है। उपायुक्त ने मतदाताओं से निर्भीक होकर मतदान करने और शांतिपूर्ण चुनाव में सहयोग की अपील की।
धनबाद: 23 फरवरी को मतदान, 27 फरवरी को मतगणना
धनबाद के प्रभारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने बताया कि धनबाद नगर निगम और चिरकुंडा नगर परिषद के लिए मतदान 23 फरवरी को होगा, जबकि मतगणना 27 फरवरी को कराई जाएगी।
धनबाद नगर निगम के 55 वार्डों में कुल 8 लाख 97 हजार 936 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसके लिए 974 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं चिरकुंडा नगर परिषद क्षेत्र में 37 हजार 6 मतदाता हैं, जिनके लिए 42 मतदान केंद्र निर्धारित किए गए हैं। मतगणना धनबाद के पॉलिटेक्निक भवन में होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।
रांची नगर निगम पर खास नजर, नामांकन से लेकर मतदान तक पूरा शेड्यूल तय
राज्य की सबसे अहम शहरी सीट मानी जाने वाली रांची नगर निगम को लेकर भी चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। उप विकास आयुक्त सौरभ कुमार भुवनिया ने बताया कि उम्मीदवार 29 जनवरी से 4 फरवरी तक नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
नामांकन की जांच 5 फरवरी, नाम वापसी की अंतिम तिथि 6 फरवरी और चुनाव चिन्हों का आवंटन 7 फरवरी को होगा। मतदान 23 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक कराया जाएगा और मतगणना 27 फरवरी को होगी।
रांची नगर निगम क्षेत्र में कुल 53 वार्ड हैं, जिनके लिए 909 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 10 लाख 27 हजार 723 है। संवेदनशीलता के आधार पर 128 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। यहां मेयर पद के लिए 25 लाख रुपये और वार्ड पार्षद पद के लिए 5 लाख रुपये की खर्च सीमा तय की गई है।
इसके अलावा बुंडू नगर पंचायत में भी चुनाव होंगे, जहां 13 वार्डों के लिए 16 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पूर्वी सिंहभूम: मानगो में पहली बार, जुगसलाई में 45 साल बाद चुनाव
पूर्वी सिंहभूम जिले में इस बार नगर निकाय चुनाव ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी कर्ण सत्यार्थी ने बताया कि मानगो नगर निगम में पहली बार चुनाव हो रहे हैं, जबकि जुगसलाई नगर परिषद में 45 साल बाद मतदान कराया जाएगा।
मानगो नगर निगम में 36 वार्ड, 190 पोलिंग स्टेशन और 1 लाख 96 हजार 791 मतदाता हैं। जुगसलाई नगर परिषद में 22 वार्ड और 44 हजार 239 मतदाता हैं, जबकि चाकुलिया नगर पंचायत में 12 वार्ड और 12 हजार 587 मतदाता मतदान करेंगे।
आरक्षण की स्थिति के तहत मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगर परिषद की प्रमुख सीटें अनारक्षित महिला के लिए, जबकि चाकुलिया नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित की गई है।
रामगढ़ नगर परिषद: गैर-दलीय आधार पर चुनाव, 98 मतदान केंद्र
रामगढ़ नगर परिषद (वर्ग-क) के आम निर्वाचन 2026 की घोषणा के साथ ही यहां भी आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। यह चुनाव पूरी तरह गैर-दलीय आधार पर होगा।
रामगढ़ नगर परिषद क्षेत्र में कुल 32 वार्ड हैं और अध्यक्ष का प्रत्यक्ष निर्वाचन होगा। कुल 97 हजार 698 मतदाता हैं, जिनके लिए 90 मतदान केंद्र और 8 सहायक मतदान केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रखंडवार विस्तृत व्यवस्था तैयार की है।
झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 : मेयर के पास कितनी ताकत होती है और जनता क्या उम्मीद करे?
जन-मन की बात विश्लेषण
झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 सिर्फ स्थानीय प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शहरी शासन, प्रशासनिक दक्षता और नागरिक सुविधाओं की दिशा तय करने वाला चुनाव है। जिस तरह से जिलावार खर्च सीमा, संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान और चरणबद्ध सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है, उससे यह साफ है कि प्रशासन इस बार चुनावी प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
हालांकि असली परीक्षा मतदान के दिन और उसके बाद होगी, जब प्रशासन को निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था — तीनों मोर्चों पर संतुलन साधना होगा।