Ranchi : राज्य सरकार ने 29 जनवरी को हाईकोर्ट में कहा कि चार सप्ताह में सूचना आयोग को कार्यशील कर दिया जायेगा। 29 जनवरी को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने की। खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा कि सूचना आयोग को कब तक पूरी तरह कार्यशील किया जाएगा।
इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि चार सप्ताह के भीतर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर आयोग को फंक्शनल कर दिया जाएगा। दलील सुनने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह का अंतिम समय प्रदान किया।कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 12 दिसंबर 2025 को ही सूचना आयोग को क्रियाशील करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
झारखंड में मई 2020 से राज्य सूचना आयोग में न तो मुख्य सूचना आयुक्त और न ही किसी सूचना आयुक्त की नियुक्ति हुई है, जिसके कारण सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत द्वितीय अपीलों की सुनवाई पूरी तरह ठप पड़ी है।
इससे पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि सूचना आयोग को शीघ्र कार्यशील नहीं किया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने इसी कारण मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
एक आरटीआई अपील से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला बिरेंद्र सिंह नामक अपीलकर्ता से जुड़ा है, जिन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगी थी। 30 दिनों की वैधानिक अवधि बीत जाने के बावजूद उन्हें कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसके बाद उन्होंने प्रथम अपील दायर की, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। हालांकि, पहले एकल पीठ ने वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। उसी आदेश के खिलाफ यह अपील दायर की गई, जिसकी सुनवाई में सूचना आयोग की निष्क्रियता का मुद्दा सामने आया।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार ने पक्ष रखा। यह जानकारी हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि तय समयसीमा के भीतर आयोग को पूरी तरह कार्यशील कर दिया जाएगा।