ED दफ्तर में रांची पुलिस की छापेमारी से टकराव तेज, CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंची एजेंसी

Anand Kumar
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ED

Ranchi : झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस के बीच टकराव अब अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। रांची स्थित ED कार्यालय में पुलिस छापेमारी और जांच के खिलाफ ED ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर (सीबीआई ) CBI जांच की मांग की है। साथ ही ED ने संबंधित FIR को निरस्त करने और पुलिस कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 जनवरी को तय की है।

यह पूरा विवाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (PHED) के कैशियर संतोष कुमार की शिकायत से शुरू हुआ। संतोष कुमार पर शहरी जलापूर्ति योजना में 20 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप है, जिसकी मनी लॉन्ड्रिंग जांच ED कर रही है। संतोष पहले रांची पुलिस द्वारा गिरफ्तार हो चुके हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

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FIR में गंभीर आरोप, पुलिस की बड़ी कार्रवाई

संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में दर्ज कराई गई FIR में ED के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। FIR के मुताबिक, 12 जनवरी को संतोष ED कार्यालय (हिनू) पहुंचे, जहां पूछताछ के दौरान उनसे कथित तौर पर जबरन स्वीकारोक्ति कराने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि मना करने पर उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और सदर अस्पताल में छह टांके लगाने पड़े।

FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें देर रात तक रोके रखा गया, खून से सनी टी-शर्ट उतरवाकर नई टी-शर्ट पहनाई गई और जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। परिवार, वकील या मीडिया को सूचना देने से रोकने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी शामिल हैं।

इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने कांड संख्या 05/2026 दर्ज की और गुरुवार सुबह सदर डीएसपी और एयरपोर्ट थाना प्रभारी के नेतृत्व में बड़ी पुलिस टीम ED कार्यालय पहुंची। पुलिस ने मौके से CCTV फुटेज जब्त किया और कार्यालय परिसर में जांच की। फोरेेंसिक टीम को भी बुलाया गया। स्थिति को देखते हुए ED ने अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बुलाया।

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ED का पलटवार : आरोप सिरे से खारिज

ED के अधिकारियों ने संतोष कुमार के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। एजेंसी का कहना है कि संतोष को कोई समन जारी नहीं किया गया था और वे स्वेच्छा से कार्यालय आए थे। ED का दावा है कि संतोष ने खुद को कांच की बोतल से चोट पहुंचाई, ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके। एजेंसी ने इसे जांच में बाधा डालने और सबूत नष्ट करने की साजिश बताया है।


राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज

इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। झारखंड भाजपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे” और आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों को डराने के लिए ED पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।


ED बनाम राज्य सरकार – टकराव की पृष्ठभूमि

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब झारखंड में ED कई हाई-प्रोफाइल मामलों—जैसे शराब घोटाला और भूमि घोटाला—की जांच कर रही है, जिनमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। ED का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई उसकी जांच में दखलंदाजी है, जबकि राज्य पुलिस इसे कानून के तहत कार्रवाई बता रही है।

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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