बजट पर सियासी संग्राम : बाबूलाल ने बताया दिशाहीन, इरफान ने किया बचाव, सरयू बोले- नई सोच का अभाव

Anand Kumar
5 Min Read

Ranchi : झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होते ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर सत्ता पक्ष इसे विकासोन्मुख और संतुलित बजट बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे आंकड़ों की बाजीगरी करार दे रहा है। बजट को लेकर सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिख रहा है।

“आंकड़ों का खेल, जमीनी हकीकत अलग” – बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बजट को “दिशाहीन” बताते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि राज्य सरकार हर वर्ष आकार में बड़ा बजट पेश करती है, लेकिन आवंटित राशि का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाती।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई विभागों में बजटीय राशि समय पर खर्च नहीं हो पाती, जिसके कारण विकास योजनाएं अधूरी रह जाती हैं। सड़क, नाली, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “सरकार कागजों पर विकास दिखा रही है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे अलग है।”

मरांडी ने यह भी कहा कि प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार पर दोष मढ़ती रही है।

यह भी पढ़ें – झारखंड : वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पेश किया 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ का बजट, केंद्र से बकाया पर सवाल

रिम्स-2 परियोजना पर सवाल

रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 के निर्माण को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका तर्क है कि जब राज्य में बंजर भूमि उपलब्ध है तो उपजाऊ कृषि भूमि पर निर्माण करना उचित नहीं है। उन्होंने स्थानीय विरोध का हवाला देते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की।

“सर्वांगीण विकास का रोडमैप” – इरफान अंसारी

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि बजट राज्य के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

उनके अनुसार सरकार की प्राथमिकता स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना को मजबूत करना है। रिम्स-2 परियोजना को उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम बताया। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि बजट में घोषित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत किया गया है।

“पुराने प्रावधान, नयी पैकेजिंग” – सरयू राय

जदयू विधायक सरयू राय ने भी बजट पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि इसमें कोई नई सोच या अभिनव पहल दिखाई नहीं देती।

राय के मुताबिक यह बजट पिछले वर्ष की घोषणाओं का ही पुनर्पैकेजिंग है। “राज्य को ऐसे बजट की जरूरत है जो आर्थिक अनुशासन के साथ ठोस प्राथमिकताएं तय करे और राजस्व-सृजन के नए स्रोत विकसित करे,” उन्होंने कहा।

यह भी पढ़ें – आज विधानसभा में पेश होगा झारखंड का बजट, 1 लाख 61 हजार 5 सौ करोड़ हो सकता है आकार

आर्थिक अनुशासन बनाम राजनीतिक नैरेटिव

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड जैसे संसाधन-संपन्न लेकिन राजस्व-निर्भर राज्य के लिए बजट का आकार ही पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यय क्षमता और परिणामोन्मुख क्रियान्वयन अधिक महत्वपूर्ण है।

राज्य में पिछले वर्षों में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) के संतुलन पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। यदि बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और प्रशासनिक खर्च में चला जाता है, तो विकास परियोजनाओं के लिए वास्तविक संसाधन सीमित रह जाते हैं।

रिम्स-2 जैसी बड़ी परियोजनाएं स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूती दे सकती हैं, लेकिन भूमि चयन, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय सहमति जैसे पहलुओं पर पारदर्शिता आवश्यक है।

सदन में होगी विस्तृत बहस

फिलहाल बजट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में विधानसभा में विस्तृत चर्चा के दौरान यह स्पष्ट होगा कि सरकार आलोचनाओं का किस तरह जवाब देती है और क्या किसी संशोधन या स्पष्टीकरण की संभावना बनती है।

राजनीतिक दृष्टि से यह बजट आगामी चुनावी समीकरणों की पृष्ठभूमि भी तैयार कर सकता है, क्योंकि विकास और संसाधन प्रबंधन का मुद्दा राज्य की राजनीति में केंद्रीय स्थान रखता है।

Share This Article
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *