झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक : सरकार की गंभीरता पर सरयू राय ने उठाये सवाल, मंत्री बोले – सुधार जरूरी था

Anand Kumar
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Ranchi : झारखंड विधानसभा ने बजट सत्र के दौरान झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राज्य के उच्च शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने विधेयक को समय की जरूरत बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।


“एक साल से था समय, पढ़ नहीं पाए तो जिम्मेदारी किसकी?”

सदन में जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि यह विधेयक नया नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष से ही चर्चा में है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो विधायक अब यह कह रहे हैं कि उन्होंने 135 पेज का विधेयक नहीं पढ़ा, उन्हें पिछले एक साल में इसे पढ़ने का पर्याप्त समय मिला था। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक को प्रवर समिति में भेजने से भी कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होता, क्योंकि मूल विषय पहले से स्पष्ट था।


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विधेयक में क्या हैं बड़े प्रावधान

सरकार के अनुसार, इस विधेयक के तहत:

  • राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान ढांचा तैयार किया जाएगा
  • कुलपति की नियुक्ति में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की संयुक्त भूमिका होगी
  • शैक्षणिक मानकों में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर रहेगा

अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा।


सरयू राय का हमला: “सरकार गंभीर नहीं”

विधेयक के पारित होने के बाद जदयू विधायक सरयू राय ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुलपति नियुक्ति में राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त भूमिका देने के बजाय एक व्यापक चयन प्रक्रिया होनी चाहिए थी, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया जा सकता था। सरयू राय ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के मुद्दे पर गंभीर नहीं है और यह विधेयक अपेक्षित सुधार देने में सक्षम नहीं होगा।


पुराना विधेयक, नया विवाद

यह विधेयक 2025 में पारित संस्करण का संशोधित रूप है, जिसे पहले राजभवन ने कुछ आपत्तियों के साथ वापस भेजा था। अब इसे दोबारा पारित किया गया है, लेकिन विपक्ष अब भी इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जता रहा है, जबकि सरकार इसे सुधार और पारदर्शिता का कदम बता रही है।


आगे क्या: राज्यपाल की मंजूरी पर टिकी नजर

अब इस विधेयक का अगला पड़ाव राजभवन है। राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा और राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव लागू होंगे। यह देखना अहम होगा कि इस कानून के लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में कितना सुधार आता है।

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आउटसोर्सिंग बहाली में युवाओं के ‘शोषण’ पर बिफरे प्रदीप यादव

बजट सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी एजेंसियां तृतीय और चतुर्थवर्गीय पदों पर बहाली के नाम पर राज्य के बेरोजगार नौजवानों से मोटी रकम वसूल रही हैं।

मुख्य बिंदु :

  • शोषण का आरोप : प्रदीप यादव ने कहा कि मैनपावर सप्लाई के नाम पर युवाओं का आर्थिक शोषण हो रहा है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
  • नियमावली पर सवाल : ‘मैन पावर प्रोक्योरमेंट मैन्युअल 2025’ को उन्होंने नाकाफी बताया। उनके अनुसार, 100% स्थानीय बहाली और पारदर्शी चयन के नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
  • मंत्रियों की स्वीकारोक्ति : यादव ने दावा किया कि खुद सरकार के मंत्री भी इस व्यवस्था की कमियों को स्वीकार कर रहे हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में मुद्दा उठने के बाद दोषी कंपनियों पर नकेल कसी जाएगी और युवाओं को भ्रष्टाचार मुक्त रोजगार मिलेगा।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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