Ranchi : झारखंड में शहरी निकाय चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर हो रहे हों, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं दिख रही। सोमवार को भाजपा नेताओं ने राज्य निर्वाचन आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई, वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा समर्थित प्रत्याशी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाया।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद को सौंपी गई शिकायत में भाजपा नेताओं ने आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र की मेयर प्रत्याशी बिनोती हांसदा के पति बोरजो राम हंसदा पर सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा के झंडे के उपयोग का आरोप लगाया है।
भाजपा का आरोप: पार्टी झंडे का दुरुपयोग
भाजपा नेता सुधीर श्रीवास्तव और आरती कुजूर ने आयोग को बताया कि मेयर प्रत्याशी को पार्टी का आधिकारिक समर्थन नहीं है, इसके बावजूद सोशल मीडिया में भाजपा के झंडे का इस्तेमाल किया गया।
शिकायत में कहा गया कि इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने कथित वीडियो क्लिप भी आयोग को सौंपे हैं।
आयोग ने मामले की जांच कर समुचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। राज्य में 23 फरवरी को शहरी निकाय चुनाव होने हैं और प्रचार चरम पर है।
कांग्रेस का आरोप: ‘बिस्किट छाप’ के नाम पर पैकेट वितरण
दूसरी ओर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो पर चुनाव चिह्न ‘बिस्किट’ का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस का दावा है कि बाजार में विशेष पैकेजिंग वाले बिस्किट बांटे जा रहे हैं, जिन पर प्रत्याशी की तस्वीर छपी हुई है। इसे मतदाताओं को प्रभावित करने का सुनियोजित प्रयास बताया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस वितरण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया गया है और इसे प्रमाण के तौर पर आयोग को सौंपा गया है।
आचार संहिता और चुनावी मर्यादा पर सवाल
राज्य में निकाय चुनाव दलीय प्रतीक पर नहीं हो रहे हैं। ऐसे में किसी भी दल के झंडे, प्रतीक या ब्रांडिंग के इस्तेमाल को लेकर संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है। चुनाव आयोग के लिए चुनौती यह है कि वह निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखते हुए सभी पक्षों की शिकायतों की जांच करे।
23 फरवरी को मतदान, माहौल गरम
आदित्यपुर समेत राज्य के 48 नगर निकायों में 23 फरवरी को मतदान होना है। प्रत्याशी और समर्थक पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हैं।
राजनीतिक दलों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप से यह संकेत मिल रहा है कि भले ही चुनाव गैर-दलीय हों, लेकिन सियासी दांव-पेंच पूरी तरह सक्रिय हैं।
आने वाले दिनों में आयोग की जांच और संभावित कार्रवाई चुनावी माहौल को और प्रभावित कर सकती है।