Palamu : झारखंड के पलामू जिले के पड़वा थाना क्षेत्र अंतर्गत तेलियाही गांव में शनिवार देर रात एक युवक की भीड़ द्वारा पिटाई के बाद मौत हो गई। प्रारंभिक सूचना में बैटरी चोरी के शक में ग्रामीणों द्वारा मारपीट की बात सामने आई थी, लेकिन पुलिस जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा पाया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव व्याप्त है और पुलिस ने गांव में कैंप कर स्थिति पर नजर रखी है।
एसपी का बयान: प्रेमिका से मिलने गया था युवक
पलामू की पुलिस अधीक्षक रिष्मा रमेशन ने बताया कि मृतक युवक देर रात अपनी प्रेमिका से मिलने उसके घर पहुंचा था। घरवालों ने उसे देख लिया और मारपीट शुरू कर दी। शोर-शराबा होने पर आसपास के लोग भी जुट गए और देखते ही देखते भीड़ ने युवक को घेर लिया।
पुलिस के अनुसार, बैटरी चोरी की अफवाह बाद में फैली, जबकि जांच में प्रेम संबंध का मामला प्रमुख कारण के रूप में सामने आया है।
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रस्सी से बांधकर की गई पिटाई
मृतक की पहचान मुरमा गांव निवासी मनोज राम के पुत्र पवन राम के रूप में हुई है। वह परिवार का इकलौता बेटा था और पेशे से ड्राइवर था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक को पकड़कर रस्सी से बांध दिया गया और लाठी-डंडों, लात-घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। वह रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन भीड़ का आक्रोश थमता नहीं दिखा।
पुलिस ने छुड़ाया, अस्पताल में तोड़ा दम
घटना की सूचना मिलते ही पड़वा थाना पुलिस गांव पहुंची। पुलिस ने किसी तरह युवक को भीड़ से मुक्त कराया और इलाज के लिए पलामू सदर अस्पताल भेजा, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं।
शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद धाराएं स्पष्ट की जाएंगी।
दो हिरासत में, अन्य की पहचान जारी
पड़वा थाना प्रभारी अंचित कुमार ने बताया कि मारपीट की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। फिलहाल दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आगे की गिरफ्तारी संभव है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गांव में अतिरिक्त बल की तैनाती कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
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भीड़ हिंसा पर कानून क्या कहता है?
झारखंड सहित देश के कई हिस्सों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी राज्यों को निर्देश दे चुका है कि भीड़ हिंसा के मामलों में त्वरित एफआईआर, नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए। ऐसे मामलों में हत्या, गैरकानूनी जमावड़ा, आपराधिक साजिश और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि अफवाह और निजी विवाद किस तरह कानून हाथ में लेने की मानसिकता को जन्म देते हैं। पुलिस अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।