Ranchi : सामाजिक-आर्थिक एवं संसदीय अध्ययन केंद्र के सचिव अयोध्या नाथ मिश्र ने झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा मंगलवार को विधानसभा में पेश किये गये ‘अबुआ दिशोम’ बजट को सीमित संसाधनों के बीच सम्यक विकास की दिशा में संतुलन साधने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि 1.58 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में कुल मिलाकर स्वकर और गैर-कर राजस्व से लगभग 67 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान है, जबकि शेष राशि के लिए राज्य को केंद्रीय सहायता, केंद्रीय अंशदान और बाजार ऋण पर निर्भर रहना पड़ेगा।
मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी से 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अपेक्षा है। साथ ही, केंद्र से मिलने वाली सहायता में वृद्धि के लिए ठोस प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि झारखंड ने वर्ष 2030 तक जीएसडीपी को 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर अनिवार्य होगी, जिसके लिए कड़े वित्तीय अनुशासन और प्रभावी आर्थिक-राजकोषीय प्रबंधन की जरूरत पड़ेगी।
उन्होंने राज्य में कृषि, एमएसएमई, उद्योग, देशज उद्यम, आधारभूत संरचना विकास तथा कल्याणकारी योजनाओं में परिणामोन्मुख निवेश को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका मानना है कि यदि विकास प्रक्रिया में कृषि, कौशल विकास और रोजगार सृजन पीछे रह जाते हैं, तो बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
मिश्र ने कहा कि खेती को केवल ‘इंश्योर्ड’ नहीं बल्कि ‘एश्योर्ड’ बनाने की दिशा में बजट से स्पष्ट प्राथमिकता तय होनी चाहिए। राज्य को राष्ट्रीय औसत विकास स्तर तक पहुंचाने के लिए आर्थिक संसाधनों की अभिवृद्धि एक चुनौती अवश्य है, लेकिन झारखंड के लिए असंभव नहीं है।