Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेश आर्थिक सर्वेक्षण (इकोनॉमिक सर्वे) ने राज्य की विकास दिशा में अहम संरचनात्मक बदलाव का संकेत दिया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सदन में रखी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक उद्योग-खनन आधारित ढांचे से आगे बढ़कर सर्विसेज सेक्टर केंद्रित विकास मॉडल की ओर अग्रसर है।
GSVA में सर्विसेज की हिस्सेदारी 45.56% तक पहुंची
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GSVA) में सर्विसेज सेक्टर की हिस्सेदारी 38.54 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 45.56 प्रतिशत हो गई है। यह बदलाव केवल आंकड़ों का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि आर्थिक संरचना में गहरे परिवर्तन का संकेत है।
2024-25 में GSVA ग्रोथ में सर्विसेज सेक्टर का योगदान 53.2 प्रतिशत रहा, जबकि उद्योग का 23 प्रतिशत और कृषि का 16 प्रतिशत योगदान दर्ज किया गया। अनुमान है कि 2025-26 में सर्विसेज सेक्टर का GSVA 1,37,730 करोड़ रुपये और 2026-27 में 1,48,479 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
प्रति व्यक्ति आय में क्रमिक वृद्धि
स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में 71,994 रुपये और 2026-27 में 75,670 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह क्रमशः 5.25 प्रतिशत और 5.18 प्रतिशत की संभावित वृद्धि दर्शाता है।
हालांकि राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के लगभग 60 प्रतिशत स्तर पर बनी हुई है, लेकिन स्थिरता और निरंतर वृद्धि को सकारात्मक संकेत माना गया है।
GSDP वृद्धि दर 5.96% रहने का अनुमान
इकोनॉमिक सर्वे में 2026-27 के लिए GSDP वृद्धि दर 5.96 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो 2025-26 की अनुमानित 6.17 प्रतिशत दर से थोड़ा कम है। उल्लेखनीय है कि 2024-25 में राज्य ने 7.02 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक रही।
यह संकेत देता है कि राज्य मध्यम लेकिन स्थिर विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है।
वित्तीय सेवाओं में तेज उछाल
सर्विसेज सेक्टर के भीतर वित्तीय सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 11 से 19 प्रतिशत के बीच रही है। अनुमान है कि वित्तीय सेवाओं का GSVA 2025-26 में 10,837 करोड़ रुपये और 2026-27 में 11,893 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, झारखंड में बहुआयामी गरीबी 2015-16 में 42.10 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 28.81 प्रतिशत रह गई। पांच वर्षों में 13.29 प्रतिशत अंकों की गिरावट राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन दर्शाती है।
इस सुधार का श्रेय लक्षित कल्याणकारी योजनाओं को दिया गया है, जिनमें सौभाग्य योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन प्रमुख हैं।
बजट का आकार और व्यय संरचना में बदलाव
वर्ष 2001-02 में 6,007 करोड़ रुपये का बजट 2024-25 में बढ़कर 1,16,892 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। 2025-26 के लिए 1,45,400 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
योजना मद पर व्यय 2018-19 में 54.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 60.7 प्रतिशत हो गया, जबकि स्थापना व्यय घटकर 39.3 प्रतिशत रह गया। पूंजीगत व्यय 2023-24 में 29 प्रतिशत तक पहुंचा, हालांकि 2024-25 में यह 25.9 प्रतिशत पर आ गया।
राजकोषीय अनुशासन कायम
कोविड वर्ष 2020-21 को छोड़कर राज्य का राजकोषीय घाटा FRBM की 3 प्रतिशत सीमा के भीतर रहा है। 2023-24 में यह 1.37 प्रतिशत था और 2024-25 में बढ़कर 2.81 प्रतिशत हुआ, फिर भी यह निर्धारित सीमा के भीतर है।
24 फरवरी को बजट पर नजर
अब राज्य की निगाहें 24 फरवरी पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। आर्थिक सर्वे के संकेत बताते हैं कि झारखंड धीरे-धीरे खनन-उद्योग आधारित मॉडल से आगे बढ़कर सर्विसेज-आधारित विकास संरचना की ओर संक्रमण कर रहा है।