Jamshedpur : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को झारखंड स्टेट हाउसिंग बोर्ड ने नोटिस जारी किया है। मामला राजधानी रांची के हरमू क्षेत्र में स्थित H-10A आवासीय प्लॉट से जुड़ा है, जिसे बोर्ड ने आवासीय उद्देश्य से आवंटित किया था।
हाउसिंग बोर्ड का आरोप है कि उक्त भूखंड पर कथित तौर पर एक पैथोलॉजी लैब/क्लिनिक संचालित की जा रही है, जो आवंटन की शर्तों का उल्लंघन है। बोर्ड ने इस संदर्भ में धोनी से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है और स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में आवंटन रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।
2005 में आवंटन, 2009 में भूखंड उपहार
जानकारी के अनुसार, हरमू स्थित यह जमीन वर्ष 2005 में आवंटित की गई थी। खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से धोनी को आवासीय प्लॉट दिया गया था। वर्ष 2009 में उन्हें पांच कट्ठा आवासीय भूखंड उपहार स्वरूप प्रदान किया गया।
इस भूखंड पर धोनी ने आवासीय भवन का निर्माण कराया और कई वर्षों तक अपने माता-पिता के साथ वहीं निवास भी किया। बाद में उन्होंने रांची के सिमलिया (रिंग रोड) क्षेत्र में अपना निजी फार्महाउस तैयार किया, जहां वर्तमान में उनका प्रवास होता है।
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खाली पड़ा मकान, अब व्यावसायिक गतिविधि का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, हरमू रोड स्थित यह मकान लंबे समय तक सुरक्षा गार्ड की निगरानी में खाली पड़ा रहा। हाल के दिनों में इसे क्लिनिक/लैब के रूप में उपयोग किए जाने की सूचना पर बोर्ड ने संज्ञान लिया।
अधिकारियों का कहना है कि आवासीय प्लॉट का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है और ऐसे मामलों की व्यापक समीक्षा शुरू की गई है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि यह कार्रवाई किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों के समान अनुपालन की दिशा में उठाया गया कदम है।
पहले भी शुरू हुई जांच, कई मामलों की समीक्षा
हाउसिंग बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, राजधानी समेत विभिन्न शहरी इलाकों में आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग के मामलों की जांच की जा रही है। यदि किसी आवंटित भूखंड का उपयोग मूल उद्देश्य से हटकर किया जाता है, तो नियमानुसार नोटिस और आगे की कार्रवाई संभव है।
बोर्ड का कहना है कि आवंटन की शर्तों को सख्ती से लागू करना उसकी जिम्मेदारी है, चाहे संबंधित व्यक्ति सामान्य नागरिक हो या चर्चित सार्वजनिक हस्ती।
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15 दिनों में जवाब, आगे की कार्रवाई जवाब पर निर्भर
नोटिस में 15 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है। धोनी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के आधार पर ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा सकती है।
राजनीतिक हलकों में भी इस नोटिस को लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने धोनी को झारखंड का गौरव बताया था। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पूर्व कप्तान की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और हाउसिंग बोर्ड आगे क्या कदम उठाता है।