Anand Kumar
भारतीय राजनीति इस समय दो प्रमुख ध्रुवों में बंटी हुई दिखाई देती है। एक तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) है, जिसका चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जबकि दूसरी ओर इंडिया गठबंधन है, जिसके सबसे प्रमुख नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी माने जाते हैं।
हाल के दिनों में राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक बैठक में दावा किया कि भाजपा को यदि कोई राजनीतिक दल पराजित कर सकता है तो वह कांग्रेस ही है। यह दावा स्वाभाविक रूप से राजनीतिक आत्मविश्वास का परिचायक है, लेकिन इसके समानांतर कुछ ऐसे राजनीतिक तथ्य भी हैं जो इस दावे की व्यावहारिकता पर सवाल खड़े करते हैं।
राजनीति में सत्ता का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन किसी भी दल की वास्तविक शक्ति उसके संगठन, जनाधार और राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र से तय होती है। पिछले एक दशक में कांग्रेस ने केवल कई राज्यों की सत्ता नहीं गंवाई, बल्कि अनेक क्षेत्रों में उसका पारंपरिक जनाधार भी कमजोर हुआ है। तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दिल्ली जैसे राज्यों में कांग्रेस अब मुख्य राजनीतिक धुरी की बजाय सहयोगी दलों के पीछे खड़ी दिखाई देती है।
झारखंड की वर्तमान राजनीति भी इसी व्यापक राष्ट्रीय परिघटना का एक दिलचस्प उदाहरण प्रस्तुत करती है।
झारखंड में कांग्रेस की स्थिति क्यों चर्चा में है?
2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के गठबंधन ने कुल 56 सीटें हासिल की थीं। इनमें JMM के 34, कांग्रेस के 16 और RJD के 4 विधायक हैं।
संख्यात्मक दृष्टि से कांग्रेस गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बावजूद आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अब तक अपनी दावेदारी को लेकर स्पष्ट और निर्णायक स्थिति में दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी नेतृत्व और राज्य प्रभारी लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अब तक उम्मीदवार के नाम को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
यहीं से राजनीतिक बहस शुरू होती है।
कांग्रेस के भीतर भी ऐसे स्वर सुनाई दे रहे हैं कि गठबंधन की एकजुटता को देखते हुए अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति से ही होना चाहिए। इससे राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या झारखंड में कांग्रेस अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ बातचीत कर रही है या फिर गठबंधन की बड़ी पार्टी JMM की राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप चल रही है।
क्या JMM की ताकत कांग्रेस पर भारी पड़ रही है?
यह भी एक राजनीतिक तथ्य है कि झारखंड में JMM की वर्तमान मजबूती का एक बड़ा आधार कांग्रेस के साथ उसका गठबंधन है। दूसरी ओर कांग्रेस को भी यह समझना होगा कि गठबंधन राजनीति में यदि किसी दल की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज कमजोर पड़ने लगे तो उसका दीर्घकालीन प्रभाव संगठन और जनाधार दोनों पर पड़ सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के सामने यही चुनौती पहले भी कई राज्यों में देखी जा चुकी है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, बिहार में राजद, तमिलनाडु में डीएमके और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की राजनीति करते हुए कांग्रेस का स्वतंत्र जनाधार लगातार सिमटता गया।
ऐसे में झारखंड का राज्यसभा चुनाव केवल दो सीटों का चुनाव नहीं रह जाता, बल्कि यह कांग्रेस की राजनीतिक हैसियत की भी परीक्षा बन जाता है।
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RJD की भूमिका भी हो सकती है निर्णायक
इस पूरे समीकरण में RJD की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गठबंधन में उसके चार विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक वोट का महत्व होता है।
वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल में झारखंड से कुल चार राज्यसभा सदस्य चुने जाने हैं। इनमें दो सीटों के लिए चुनाव जून 2026 में होना है, जबकि दो सीटों के लिए चुनाव 2028 में प्रस्तावित हैं।
ऐसी स्थिति में एक संभावित राजनीतिक फार्मूला यह भी हो सकता है कि चार सीटों के इस चक्र में JMM को दो, कांग्रेस को एक और RJD को एक सीट दी जाए। यदि ऐसा कोई समझौता बनता है तो वर्तमान चुनाव में कांग्रेस को अवसर मिल सकता है और 2028 में RJD को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक सहमति और गठबंधन नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।
आगे क्या?
झारखंड की राजनीति फिलहाल एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। राज्यसभा चुनाव यह तय करेगा कि महागठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन किस दिशा में जा रहा है। क्या कांग्रेस अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर अधिक मुखर होगी? क्या RJD भी अपनी दावेदारी मजबूती से रखेगी? या फिर गठबंधन का पूरा समीकरण JMM और हेमंत सोरेन के नेतृत्व के इर्द-गिर्द ही तय होगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे, लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव केवल सांसद चुनने का चुनाव नहीं, बल्कि झारखंड महागठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की दिशा तय करने वाला चुनाव भी साबित हो सकता है।
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