रांची : झारखंड के निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को हजारीबाग के चर्चित वनभूमि घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है। इसके साथ ही करीब 425 दिनों से जेल में बंद विनय चौबे की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे आज जेल से बाहर आ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि विनय चौबे बिना अदालत की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे, जांच में पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे।
विनय चौबे को पहली बार 20 मई 2025 को झारखंड की नई शराब नीति से जुड़े कथित शराब घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार किया था। उन पर नई आबकारी नीति के जरिए कुछ सिंडिकेट को अनुचित लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को करीब 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इस मामले में उन्हें अगस्त 2025 में डिफॉल्ट बेल मिल गई थी।
इसके बाद उनके खिलाफ हजारीबाग खासमहाल जमीन घोटाला, आय से अधिक संपत्ति और वनभूमि घोटाला समेत कुल चार मामले दर्ज हुए। खासमहाल जमीन घोटाला और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। हालांकि वनभूमि घोटाले में जमानत नहीं मिलने के कारण वे लगातार जेल में थे।
हजारीबाग के वनभूमि घोटाला मामले में एसीबी ने आरोप लगाया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर वनभूमि, ट्रस्ट और गैर-मजरूआ जमीन की अवैध रजिस्ट्री और जमाबंदी कराई गई। जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में विनय चौबे के करीबी लोगों के नाम पर भी जमीन की खरीद-बिक्री के साक्ष्य मिले हैं। एसीबी ने फरवरी 2026 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
इस चर्चित मामले में कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें विनय चौबे के अलावा उनके करीबी विनय सिंह, स्निग्धा सिंह, हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार और अन्य लोग शामिल हैं।
झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से अब उन्हें राहत मिल गई है। चूंकि अन्य सभी मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए अब केवल जेल से रिहाई की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
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