रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को दोहरी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा। झारखंड हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, वहीं रांची की विशेष PMLA अदालत ने हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। इसके साथ ही मामले में उनके खिलाफ ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया।
हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत
हेमंत सोरेन ने झारखंड हाई कोर्ट में विशेष PMLA अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। अदालत ने ईडी को मामले में एक सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया और संबंधित पक्षों को उसकी प्रति उपलब्ध कराने को कहा। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अक्टूबर को होगी।
PMLA कोर्ट में हेमंत सोरेन पर आरोप तय
इसी बीच रांची की विशेष PMLA अदालत में 8.86 एकड़ बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए। अदालत की इस कार्रवाई के साथ मामले की सुनवाई यानी ट्रायल आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।
यह मामला रांची के बड़गाईं इलाके की 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जी तरीके से अधिग्रहण और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की है।
हेमंत सोरेन ने क्या कहा था?
हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। उनकी ओर से मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया था।
24 सितंबर को हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष PMLA अदालत में पेश हुए थे। उन्होंने ईडी की ओर से उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेजों को देखने के लिए समय मांगा था। अदालत ने उन्हें समय देते हुए आरोप गठन पर अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की थी।
इससे पहले विशेष PMLA अदालत ने 21 सितंबर को आरोप गठन की प्रक्रिया टालने की उनकी मांग को खारिज कर दिया था।
जून में भी मिली थी राहत नहीं
इस मामले में हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को खारिज कर दिया था। अदालत ने माना था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार हैं। इसके बाद हेमंत सोरेन ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
18 सितंबर को झारखंड हाई कोर्ट ने भी उनकी डिस्चार्ज याचिका से संबंधित चुनौती में उन्हें राहत नहीं दी थी, जिसके बाद निचली अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ।
कई आरोपितों पर पहले ही हो चुका है आरोप गठन
इस मामले में हेमंत सोरेन के अलावा कई अन्य आरोपी भी हैं। विशेष PMLA अदालत पहले ही कई आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है। इनमें अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, पूर्व राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, तपस घोष, शेखर कुशवाहा और मोहम्मद सद्दाम हुसैन समेत अन्य नाम शामिल हैं।
अब हेमंत सोरेन के खिलाफ भी आरोप तय होने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है।
क्या आरोप तय होना दोष साबित होना है?
नहीं। आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है। इसका अर्थ यह है कि अदालत ने मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की है। आरोपों को अभियोजन पक्ष को मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा और आरोपी को अपना बचाव प्रस्तुत करने का पूरा कानूनी अधिकार है।
बड़गाईं जमीन मामले में अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हाई कोर्ट में हेमंत सोरेन की याचिका पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी, जबकि PMLA अदालत में आरोप तय होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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