व्यंग्य : ₹450 में सिलेंडर का वादा, रिक्शा पॉलिटिक्स और रील की दुकान

Anand Kumar
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Anand Kumar
झारखंड की सियासत में इन दिनों ‘गैस’ बहुत चढ़ी हुई है, सिलेंडर वाली कम, और दावों वाली ज्यादा! 2024 के चुनाव में कांग्रेस के ‘झारखंड प्रभारी’ गुलाम अहमद मीर साहब ने मंच से दहाड़ते हुए एक ऐसी गैस… ओहोहो क्षमा कीजिये, ऐसा ‘वादा’ छोड़ा था कि जनता दंग रह गई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार बनी तो रसोई गैस का सिलेंडर 450 रुपये में देंगे। दरियादिली ऐसी कि घोषणा कर दी कि बंगलादेश से आये ‘घुसपैठियों’ को भी इसी रेट पर गैस देंगे! अब घुसपैठियों का तो पता नहीं, लेकिन झारखंड की भोलीभाली जनता आज भी अपना खाली सिलेंडर लेकर मीर साहब के उस 450 वाले वादे की ‘डिलीवरी’ का इंतज़ार कर रही है… लेकिन मीर साब तो तीर छोड़कर कश्मीर लौट गये हैं…

लेकिन जब पिछले दिनों पत्रकारों ने झारखंड के कांग्रेस कोटे के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को घेरा और पूछा हुजूर, वो 450 रुपये वाला वादा कहां गया?” तो मंत्री जी ने जो जवाब दिया, वो ‘ऑस्कर’ लेवल का था। उन्होंने बड़ी मासूमियत से पल्ला झाड़ते हुए कहा, “देखिए भाई, यह वादा तो सिर्फ कांग्रेस का था, इंडिया गठबंधन का नहीं।” वाह! जी वाह.. क्या बात है। चुनाव लड़े गठबंधन में, वोट मांगे गठबंधन के नाम पर, लेकिन वादा ‘पर्सनल’ था? मंत्री जी यह बताना भूल गए कि जब कांग्रेस अलायंस की ‘जूनियर पार्टनर’ थी और सब कुछ पहले से तय था, तो जनता को ठगने के लिए अलग से ‘मेनिफेस्टो’ का रायता क्यों फैलाया था प्रभु? खैर, यह राजनीति है बाबू, यहां वादे सिर्फ लुभाने के लिए होते हैं, निभाने के लिए नहीं!

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लेकिन वादे पूरे करने में भले ही सरकार की ‘सांस’ फूल रहा हो, लेकिन रील के परफॉरमेंस में इनके फेफड़े जबरदस्त काम कर रहे हैं। अब टरफान अंसारी साहब को ही देख लीजिये। इनका स्वास्थ्य विभाग भले वेंटीलेटर पर है, पर मंत्रीजी को इससे फर्क नहीं पड़ता.. उनका ज्यादा समय तो ‘रील’ बनाने, उटपटांग बयान देने और ‘नौटंकी’ करने में जाता है।

जनाब आज रिक्शा चलाकर विधानसभा पहुंच गए! ऊपर से सवारी भी बिठा ली.. सवारी भी कौन? अरे वही.. अपनी शिल्पी नेहा तिर्की जी। बंधु भइया की बिटिया.. वही, जिन्होंने बिहार से आने वाले लोगों के रामगढ़ में ‘मुखिया’ बनने वाला बयान देकर खूब चर्चा बटोरी थी।

अजीब विडंबना है! जो कांग्रेसी खुद सरकार में मंत्री बने बैठे हैं, जिनके हाथ में ताकत है, जिनके पास खजाने की चाबी है, जिन्हें 450 रुपये में सिलेंडर दे देना चाहिए था, वो रिक्शा खींच रहे हैं। कायदे से तो पहले राज्य में सस्ता सिलेंडर देना चाहिए था, फिर मोदी सरकार का विरोध करते तो जनता भी ‘ताली’ बजाती। पर यहां तो मामला ही उल्टा है।

पर जनता भी जानती है कि यह सब सेवा नहीं, ‘कंटेंट’ है। मंत्री जी को जनता की फिक्र हो न हो, कैमरे के ‘एंगल’ और रील के ‘व्यूज’ की फिक्र भरपूर है। विधानसभा का सत्र है या किसी फिल्म का सेट, समझ ही नहीं आता। मंत्रियों का यह ‘रिक्शा स्टंट’ सिर्फ इसलिए था ताकि सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी जा सकें।

तो वादे गए तेल लेने या ये भी कह सकते हैं गैस लेने गये हैं..। लेकिन फिलहाल तो रील बन गई है, शेयर हो रही है, बस आप भी मजे लीजिये! क्योंकि झारखंड में अब सिलेंडर सस्ता मिले न मिले, एंटरटेनमेंट भरपूर मिलता रहेगा।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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