हेमंत कैबिनेट की बैठक : गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव, पहली फीस की प्रतिपूर्ति और मार्जिन मनी खत्म

Anand Kumar
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रांची: झारखंड के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बड़ी राहत देने की दिशा में हेमंत सोरेन सरकार ने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मार्गदर्शिका में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में योजना में बदलाव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के आधिकारिक निर्णयों में भी गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मार्गदर्शिका में संशोधन को स्वीकृति दिए जाने की पुष्टि की गई है।

प्रवेश के समय जमा फीस की होगी प्रतिपूर्ति

संशोधन के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के समय विद्यार्थियों को अपनी ओर से जमा करनी पड़ने वाली प्रथम सेमेस्टर या प्रथम वर्ष की फीस की एकमुश्त प्रतिपूर्ति वेब पोर्टल के माध्यम से किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें शिक्षा ऋण स्वीकृत होने से पहले कॉलेज या विश्वविद्यालय में फीस जमा करने की जरूरत पड़ती है।

15 लाख रुपये तक के ऋण पर मार्जिन मनी खत्म

योजना के तहत विद्यार्थियों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए 15 लाख रुपये तक के सभी ऋणों पर लागू 5 प्रतिशत मार्जिन मनी को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। इससे पात्र विद्यार्थियों को ऋण की राशि हासिल करने में पहले की तुलना में आसानी होगी और उच्च शिक्षा के लिए परिवार पर पड़ने वाला तत्काल आर्थिक दबाव कम होगा।

केंद्रीय विश्वविद्यालय भी योजना के दायरे में

योजना के क्रियान्वयन में सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी समेत भारत सरकार द्वारा अधिसूचित केंद्रीय विश्वविद्यालयों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इससे झारखंड के विद्यार्थियों के लिए देश के प्रमुख केंद्रीय संस्थानों में उच्च शिक्षा हासिल करने के अवसर बढ़ेंगे।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब तक 3,434 विद्यार्थियों के लिए 291 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 65 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

छात्र अनुसंधान और नवाचार नीति-2026 को भी मंजूरी

कैबिनेट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार और प्री-इन्क्यूबेशन को बढ़ावा देने के लिए झारखंड छात्र अनुसंधान एवं नवाचार नीति-2026 को भी मंजूरी दी है। कैबिनेट के आधिकारिक निर्णयों में इस नीति के गठन को स्वीकृति दिए जाने की पुष्टि है।

प्रस्तावित नीति के तहत राज्य में शोध और नवाचार का इकोसिस्टम मजबूत करने, विद्यार्थियों को नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। दी गई जानकारी के मुताबिक 2026 से 2031 के बीच इस दिशा में 1,834.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का लक्ष्य है।

राज्य में स्टेट इनोवेशन पार्क के साथ 300 से अधिक संस्थानों में Institution Research and Innovation Cell स्थापित किए जाने की योजना है। इसके अलावा सीड फंडिंग, मुख्यमंत्री शोध फैलोशिप, पेटेंट सहायता और ग्रासरूट्स इंटर्नशिप जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

10 हजार स्नातक छात्रों को मिलेगी ग्रासरूट्स इंटर्नशिप

कैबिनेट ने झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप योजना में संशोधन को भी मंजूरी दी है। आधिकारिक कैबिनेट निर्णयों में इस योजना में संशोधन को स्वीकृति दिए जाने की पुष्टि है।

नई व्यवस्था के तहत राज्य के 10 हजार स्नातक विद्यार्थियों को आठ सप्ताह की इंटर्नशिप देने का प्रस्ताव है। इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थी गांवों में जाकर पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण नवाचारों का डिजिटल दस्तावेज तैयार करेंगे।

योजना के तहत विद्यार्थियों का स्टाइपेंड 10 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया है। इसे राज्य की सभी 4,345 पंचायतों तक विस्तारित करने की योजना है। इसके संचालन पर प्रतिवर्ष करीब 19.33 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने का अनुमान है।

दो मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी एमबीबीएस और पीजी सीटें

झारखंड के दो प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने का भी फैसला लिया गया है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर और शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ नए स्नातकोत्तर विषय शुरू करने और पीजी सीटों में वृद्धि की स्वीकृति दी गई है।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर के लिए 2026-27 से 2029-30 की अवधि में करीब 393.91 करोड़ रुपये, जबकि शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद के लिए करीब 495.03 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। कैबिनेट के आधिकारिक निर्णय में दोनों संस्थानों में एमबीबीएस और पीजी सीटों के विस्तार की पुष्टि है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 67 से घटाकर 65 वर्ष

कैबिनेट ने झारखंड स्वास्थ्य सेवा के गैर-शैक्षणिक चिकित्सकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु में भी बदलाव को मंजूरी दी है। अब सेवानिवृत्ति की उम्र 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष करने का निर्णय लिया गया है।

इन फैसलों को उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में सरकार के महत्वपूर्ण निर्णयों के तौर पर देखा जा रहा है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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