Ranchi : झारखंड विधानसभा के प्रश्नकाल में जमशेदपुर स्थित नवनिर्मित एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पानी की व्यवस्था को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जदयू विधायक सरयू राय ने आरोप लगाया कि पर्याप्त जलापूर्ति के बिना अस्पताल भवन का उद्घाटन कर ओपीडी सेवा शुरू कर दी गई, जिसके कारण मरीजों को कठिनाई और ऑपरेशन टलने की स्थिति पैदा हो रही है।
इस पर स्वास्थ्य विभाग के मंत्री इरफान अंसारी ने जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठा रही है और छह माह के भीतर स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी।
“बिना तैयारी के शिफ्ट क्यों किया गया अस्पताल?”
सरयू राय ने सदन में सवाल उठाया कि 5 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव से पहले नए भवन में ओपीडी सेवा का उद्घाटन किया गया, जबकि उस समय भी जलापूर्ति की मुकम्मल व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि पानी के अभाव में ऑपरेशन तक टल रहे हैं और टैंकर के भरोसे अस्पताल संचालन संभव नहीं है।
उन्होंने पूछा कि आखिर पूरी तैयारी के बिना अस्पताल को नए भवन में क्यों स्थानांतरित किया गया।
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मंत्री का जवाब: अस्थायी बोरिंग, फिर टैंकर से आपूर्ति
मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि उद्घाटन के समय निर्माण एजेंसी और जेएसबीसीसीएल ने अस्थायी बोरिंग के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था की थी, लेकिन फरवरी माह में जलस्तर नीचे जाने के कारण संकट उत्पन्न हुआ। वर्तमान में मानगो नगर निगम के जरिए टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 10.69 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं, जिनमें से 4.27 करोड़ और 4.41 करोड़ रुपये की दो किस्तें नगर निगम को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि छह माह के भीतर अस्पताल को पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित कर दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर टाटा कंपनी से भी सहयोग लिया जाएगा।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में हुई कमियों के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।
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प्रसव वार्ड की स्थिति पर भी सवाल
जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा विधायक पूर्णिमा साहू ने भी एमजीएम अस्पताल की बदइंतजामी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रसव वार्ड की स्थिति खराब है और महिलाओं को पर्याप्त बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि सदन को गुमराह न किया जाए। यदि कहीं कोई कमी पाई जाती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम संचालन
यह प्रकरण राज्य में स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं के क्रियान्वयन और संचालन के बीच तालमेल पर सवाल खड़ा करता है। भवन निर्माण और सेवाओं की औपचारिक शुरुआत के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं जैसे जलापूर्ति बाधित रहती हैं, तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि घोषित समयसीमा के भीतर जल व्यवस्था और प्रसव वार्ड की स्थिति में वास्तविक सुधार होता है या नहीं।