देहरादून के मॉल में जमशेदपुर के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा की हत्या, गैंगवार एंगल पर जांच

Anand Kumar
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गोली लगने के बाद विक्रम शर्मा को एंबुलेंस में लादते पुलिसकर्मी।

कौन था विक्रम शर्मा : गुरु और सत्संगी की छवि और दो दशक का आपराधिक रिकॉर्ड

Jamshedpur : देहरादून के राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने राजधानी की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जिम से बाहर निकलते ही जमशेदपुर के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा पर तीन राउंड गोलियां चलाई गईं। दो गोलियां लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर बाइक से आए और वारदात के बाद फरार हो गए।

घटना का क्रम: घात लगाकर हमला, जवाब का मौका नहीं

पुलिस के अनुसार सुबह करीब सवा 10 से 10:30 बजे के बीच विक्रम शर्मा जिम से निकलकर मॉल की सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था। तभी पहले से घात लगाए दो शूटर उसके पास पहुंचे और नजदीक से फायरिंग कर दी। तीसरा आरोपी मुख्य सड़क पर बाइक के साथ निगरानी कर रहा था। हमला इतनी तेजी से हुआ कि विक्रम अपने पास मौजूद लाइसेंसी पिस्टल तक नहीं निकाल सका। पुलिस ने मृतक के पास से हथियार बरामद किया है।

घटना के समय मॉल के अधिकांश शोरूम बंद थे, हालांकि सफाईकर्मी और जिम स्टाफ मौजूद थे। गोलियों की आवाज से अफरातफरी मच गई। घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

भारी फोर्स, सीसीटीवी खंगाले जा रहे

सूचना मिलते ही पुलिस ने मॉल परिसर को सील कर घेराबंदी की। आईजी गढ़वाल, एसएसपी और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। मॉल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश में विशेष टीमें गठित कर नाकेबंदी की गई है। झारखंड पुलिस से भी समन्वय स्थापित किया गया है ताकि मृतक के आपराधिक नेटवर्क और संभावित रंजिशों की जानकारी जुटाई जा सके।

आपराधिक पृष्ठभूमि और गैंग कनेक्शन की जांच

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विक्रम शर्मा पर झारखंड में हत्या, वसूली और अन्य गंभीर धाराओं में 50 से अधिक मामले दर्ज रहे हैं। उनका नाम झारखंड के गैंगस्टर अखिलेश सिंह से जुड़े नेटवर्क के साथ भी जोड़ा जाता रहा है। हाल के वर्षों में कुछ मामलों में राहत मिलने के बाद वे जमशेदपुर की राजनीति में सक्रिय थे।

मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी विक्रम शर्मा फिलहाल देहरादून के रेसकोर्स क्षेत्र में रह रहा था और जमशेदपुर लागातार आनाजाना करता था। उत्तराखंड के काशीपुर में उसका स्टोन क्रशर का कारोबार बताया जाता है।

प्रारंभिक जांच में पुरानी रंजिश, आर्थिक लेनदेन और गैंगवार जैसे एंगल पर पड़ताल की जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि हमलावरों को मृतक की दिनचर्या और जिम आने-जाने के समय की सटीक जानकारी कैसे मिली।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

राजधानी के पॉश इलाके में दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। बताया जा रहा है कि विक्रम जून 2025 से इसी जिम में नियमित रूप से आ रहा था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर निगरानी और खुफिया इनपुट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में शहर में हुई अन्य गंभीर वारदातों के मद्देनज़र पुलिस की सतर्कता पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क के खुलासे के लिए बहु-आयामी जांच जारी है।

विक्रम शर्मा

कौन था विक्रम शर्मा: सत्संग की छवि और दो दशक का आपराधिक रिकॉर्ड

जमशेदपुर के अपराध जगत में ‘गुरु’ के नाम से पहचाने जाने वाले विक्रम शर्मा की पृष्ठभूमि उतनी ही विवादित रही, जितनी चर्चित। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उस पर दो दशकों में हत्या, फायरिंग और रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े कई मामले दर्ज रहे हैं।

देहरादून से गिरफ्तारी और 10 साल की फरारी

पुलिस अभिलेख बताते हैं कि वर्ष 2017 में जमशेदपुर पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 15 अप्रैल 2017 को देहरादून के एक पॉश फ्लैट से विक्रम शर्मा को गिरफ्तार किया था। उस समय वह लगभग 10 वर्षों से फरार बताया गया था। गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब जिले में वरिष्ठ स्तर पर चलाए गए अभियान में उसे ट्रैक किया गया।

गैंग नेटवर्क और ‘गुरु’ की छवि

विक्रम शर्मा का नाम झारखंड के गैंगस्टर अखिलेश सिंह के साथ जोड़ा जाता रहा है। अपराध जगत के जानकारों के अनुसार, अखिलेश सिंह के शुरुआती आपराधिक नेटवर्क के गठन में विक्रम की भूमिका बताई जाती है। उसे कथित तौर पर ‘आपराधिक गुरु’ कहा जाता रहा।

दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि विक्रम स्वयं को सत्संगी बताता था। बताया जाता है कि साकची स्थित पुराने जेल में बंद रहने के दौरान भी धार्मिक आयोजनों से अपनी अलग छवि बनाने की कोशिश की गई थी।

2008 का फायरिंग दौर और पुलिस पर दबाव की रणनीति

साल 2008 में जमशेदपुर में एक के बाद एक फायरिंग की घटनाओं ने सनसनी फैलाई थी। जांच में सामने आया था कि शहर के कुछ चर्चित व्यवसायियों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। उस समय पुलिस अधिकारियों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश का भी आरोप लगा। जांच एजेंसियों ने उस दौर की घटनाओं में विक्रम शर्मा और उसके नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की थी।

जमानत के बाद सक्रियता और निगरानी

30 जनवरी 2021 को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह अदालत में नियमित उपस्थिति की शर्त पर बाहर आया। इसके बाद वह जमशेदपुर के एमजीएम थाना क्षेत्र स्थित फ्लैट में रहने लगा और सोशल मीडिया पर भी सक्रिय दिखाई दिया। उसके परिवार के कुछ सदस्यों पर भी आपराधिक मामलों के लंबित होने की जानकारी सामने आती रही है।

गैंगवार का एंगल और खतरे की आशंका

12 जुलाई 2024 को सोनारी क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के दौरान कार्तिक मुंडा की मौत के बाद गैंगवार की चर्चाएं तेज हुई थीं। सूत्रों के मुताबिक कार्तिक मुंडा और विक्रम शर्मा के बीच पुरानी रंजिश की आशंका जताई जाती रही। इसके बाद से विक्रम को संभावित खतरे की सूचनाएं भी मिलती रही थीं।

सफेदपोश छवि बनाम आपराधिक अतीत

विक्रम शर्मा ने हाल के वर्षों में खुद को कारोबारी और सामाजिक छवि में प्रस्तुत करने की कोशिश की। हालांकि पुलिस फाइलों में दर्ज उसका आपराधिक इतिहास और गैंग नेटवर्क से जुड़ाव उसे लगातार चर्चा में बनाए रखता रहा।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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