मिडिल ईस्ट में महाजंग : सऊदी और कतर की रिफाइनरियों पर भीषण हमला, क्या ‘ऑयल वॉर’ से कांपेगी दुनिया?

Anand Kumar
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री के घरों के ऊपर संदिग्ध ड्रोन देखे गए

New Delhi/Riyadh : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग आज अपने 20वें दिन में पहुंच गई है। इस युद्ध ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है, जहां निशाना सीधे तौर पर दुनिया की ‘तेल और गैस लाइफलाइन’ को बनाया जा रहा है। सऊदी अरब की प्रमुख सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी और कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर हुए ड्रोन व हवाई हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि रास लाफान जैसे प्रमुख केंद्र को हुए नुकसान का असर लंबे समय तक वैश्विक गैस सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे ऊर्जा संकट गहराने की संभावना है।

सऊदी अरब की ‘सब्र’ वाली चेतावनी

सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित रिफाइनरी पर हमले के बाद रियाद ने तेहरान को अंतिम चेतावनी जारी की है। सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कड़े शब्दों में कहा, “हमारे देश के पास ईरान को करारा जवाब देने की पूरी ताकत है। ईरान हमारे सब्र का इम्तिहान न ले।” गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से यनबू पोर्ट ही तेल सप्लाई का मुख्य जरिया बना हुआ है।

रिफाइनरी

12 मुस्लिम देशों की एकजुटता

ईरान द्वारा कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट पर हमले के बाद 12 मुस्लिम देशों ने सऊदी की राजधानी रियाद में एक आपातकालीन बैठक की। सऊदी अरब, कतर और यूएई समेत इन देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की है और रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाने की कड़ी निंदा की है।

ट्रंप का दावा – हमले की जानकारी नहीं थी

मेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को दावा किया कि ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजराइल द्वारा किए गए हमले की जानकारी अमेरिका को पहले से नहीं थी। साउथ पार्स को दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है, इसलिए इस हमले को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, ट्रम्प के इस बयान के विपरीत, इजराइल से जुड़े एक सूत्र ने CNN को बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिका को सूचित करके ही अंजाम दिया गया था। इसके अलावा, एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने भी संकेत दिया कि वाशिंगटन को इस कार्रवाई की जानकारी पहले से थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला मौजूदा संघर्ष में बड़ा उकसावे वाला कदम माना जा रहा है। इससे पहले इजराइल ने ईरान के कुछ ऊर्जा भंडारण स्थलों को निशाना बनाया था, लेकिन तेल और प्राकृतिक गैस से जुड़े प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधा हमला नहीं किया था।

यह भी पढ़ें – ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के कोमा में होने का दावा: मीडिया रिपोर्ट में हमले में गंभीर घायल होने की बात, पीएम मोदी ने जताई चिंता

जंग के ताज़ा अपडेट्स:

  • कुवैत में भी हमला: कुवैत की मीना अब्दुल्ला रिफाइनरी के एक हिस्से को ड्रोन ने निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई।
  • वॉशिंगटन में हड़कंप: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री के घरों के ऊपर संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं, जिसके बाद व्हाइट हाउस में इमरजेंसी बैठक बुलाई गई।
  • फ्लाइट्स रद्द: हांगकांग की कैथे पैसिफिक ने सुरक्षा कारणों से दुबई और रियाद की सभी उड़ानें 30 अप्रैल तक रद्द कर दी हैं।
  • न्यूक्लियर प्रोग्राम पर विवाद: अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड का दावा है कि ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू नहीं किया है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप इसे बड़ा खतरा बता रहे हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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