झारखंड में बिना कांग्रेस और भाजपा के भी स्थिर सरकार चलाई जा सकती है : सरयू
Dhanbad : झामुमो और कांग्रेस के बीच चल रही बयानबाजी के बीच जमशेदपुर पश्चिम के विधायक और कद्दावर नेता सरयू राय के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में तूफान ला दिया है। 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को पटखनी देने वाले पूर्व मंत्री सरयू राय ने हेमंत सोरेन को कांग्रेस के दबाव से मुक्त होने की सलाह देते हुए ‘बिना शर्त’ समर्थन देने का ऐलान किया है।
शुक्रवार को धनबाद के सोनारडीह भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे सरयू राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड में बिना कांग्रेस और भाजपा के भी एक स्थिर सरकार चलाई जा सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस-भाजपा से अलग नई सरकार बनाने का खुला ऑफर देते हुए सरयू राय ने कहा कि अगर हेमंत सोरेन ऐसा चाहें, तो वे बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं.
सरयू ने दिया ‘मैजिक नंबर’ फॉर्मूला
सरयू राय ने वर्तमान विधानसभा के आंकड़ों का गणित समझाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बहुमत के लिए अब कांग्रेस की बैसाखी की जरूरत नहीं है। उन्होंने समीकरण साझा करते हुए कहा:
“झामुमो (34), राजद (04) और भाकपा माले (02) को मिलाकर कुल 40 विधायक हेमंत सोरेन के साथ हैं। बहुमत के लिए मात्र 41 का आंकड़ा चाहिए। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री कांग्रेस और भाजपा को छोड़कर नई सरकार बनाते हैं, तो हम जैसे कुछ लोग उन्हें बिना किसी शर्त के समर्थन देने को तैयार हैं।”
बिहार और असम का दिया हवाला
कांग्रेस और झामुमो के बीच बढ़ती तल्खी पर प्रहार करते हुए सरयू राय ने कहा कि कांग्रेस का चरित्र अपने सहयोगियों को दबाने का रहा है। उन्होंने कहा कि सरयू राय ने कहा –जेएमएम ने बिहार और असम के विधानसभा चुनाव में हिस्सेदारी मांगी थी जो उसे नहीं दी गयी। जहां थोड़ी गुंजाइश है, तो गठबंधन चलाने के लिए हिस्सेदारी देनी चाहिए।
नयी सरकार का मैजिक नंबर भी बताया
सरयू राय ने कहा, कि एक-दूसरे पर जैसी बयानबाजी चल रही है “हेमंत सोरेन एक ऐसी सरकार बना लें जिसमें कांग्रेस न रहे. कांग्रेस-बीजेपी को छोड़कर हेमंत सोरेन की सरकार बन सकती है। ऐसी सरकार बनती है तो मैं उसका समर्थन करूंगा। चाहें तो बिना कांग्रेस और भाजपा के सरकार बना सकते हैं. हम जैसे कुछ विधायक उन्हें बिना शर्त समर्थन देंगे.” उन्होंने वर्तमान हालात को देखते हुए ऐसी सरकार बनने की संभावना जतायी।
हालांकि सरयू राय ने यह भी कहा कि असम चुनाव के बाद क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि असम चुनाव के बाद यही दल फिर एक साथ आ जायेंगे और मतभेद खत्म होने की बात करेंगे। लेकिन अभी जैसी बयानबाजी चल रही है, उससे गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरयू राय ने कहा कि कांग्रेस प्रभारी के. राजू का यह आरोप कि झारखंड के अफसर माइनिंग माफिया के दबाव में काम कर रहे हैं, सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर हमला है. ऐसे में यदि हेमंत सोरेन तय करते हैं, उनका व्यक्तित्व बड़ा है, तो ऐसी सरकार बनायें जिसमें भाजपा न रहे तो सरकार बनायें जिसमें कांग्रेस न रहे, भाजपा भी न रहे।
वे बहुमत के करीब हैं। हम लोग दो-चार लोग उनको समर्थन दे देंगे। यह पूछने पर कि क्या समर्थन की कोई शर्त होगी, तो सरयू राय ने कहा कि वे बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं। अगर हेमंत सोरेन को लगता है कि कांग्रेस के लोग ज्यादती कर रहे हैं, ज्यादा दबाव डाल रहे हैं, तो दबाव से मुक्त हो जायें।
सोनारडीह भू-धंसान पीड़ितों के बीच पहुंचे राय
राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ सरयू राय ने सोनारडीह ओपी स्थित टांडाबस्ती में हुए दर्दनाक भू-धंसान के पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित परिवारों का हाल-चाल जाना और जिला प्रशासन से मांग की कि विस्थापित और डरे हुए परिवारों को तुरंत राहत और पुनर्वास की सुविधा मुहैया कराई जाए।
सरयू के बयान ने छेड़ी नयी चर्चा
सरयू राय का यह बयान झारखंड की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे चुका है। अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस के साथ अपने रिश्तों को लेकर कोई कड़ा फैसला लेते हैं या यह केवल एक राजनीतिक दबाव बनाने का जरिया बना रहेगा।
वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।