झारखंड में गजराज का आतंक: खूंटी में कुएं में गिरे घायल हाथी का रेस्क्यू, तो रांची के रातू में जंगली हाथी के हमले में युवक की मौत

Anand Kumar
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कुएं से बाहर निकलता हाथी।

रांची/खूंटी : झारखंड में हाथी और मानव के बीच संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर राज्य के दो अलग-अलग हिस्सों से बड़ी खबरें सामने आई हैं। जहां एक ओर खूंटी में वन विभाग ने कुएं में गिरे एक घायल हाथी की जान बचाई, वहीं दूसरी ओर रांची के रातू में एक जंगली हाथी के हमले ने एक ग्रामीण की जान ले ली।

खूंटी में कुएं में गिरे घायल जंगली हाथी का सफल रेस्क्यू

खूंटी जिले के अनिगढ़ा में वन विभाग की सूझबूझ से एक अनहोनी टल गई। जंगल से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंचा एक विशालकाय जंगली हाथी गहरे कुएं में जा गिरा

  • रेस्क्यू ऑपरेशन: डीएफओ कुलदीप यादव के नेतृत्व में जेसीबी (JCB) की मदद से कुएं की दीवार को तोड़कर हाथी के लिए ढलान वाला रास्ता बनाया गया।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा: जांच में पाया गया कि हाथी बीमार है और उसकी बाईं आंख में चोट लगी है। वर्तमान में वन कर्मी उसे कमंता डैम के रास्ते चाईबासा के घने जंगलों की ओर भेजने में जुटे हैं।
  • शांत व्यवहार: चोटिल होने के कारण इस हाथी ने खूंटी शहर के डीएवी रोड और डेली मार्केट में घूमने के बावजूद किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया।

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रांची के रातू में हाथी का हमला: महिला समेत 2 की मौत

खूंटी की राहत भरी खबर के उलट, रांची के रातू थाना क्षेत्र के पाली गांव में मातम पसरा है। यहाँ एक जंगली हाथी के हमले में सुबोध खलखो नामक युवक की मौत हो गई। हाथी के हमले में एक महिला का जान जाने की बात भी कही जा रही है।

  • दहशत का माहौल: चार दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब हाथी ने रांची के रिहायशी इलाके में घुसकर उत्पात मचाया है।
  • पिछला रिकॉर्ड: ग्रामीणों के अनुसार, यही हाथी पिछले शुक्रवार को हटिया क्षेत्र की सड़कों पर चार घंटे तक घूमता देखा गया था।
  • प्रशासनिक अपील: वन विभाग ने रातू और आसपास के ग्रामीणों से बच्चों और बुजुर्गों को घर के भीतर रखने और हाथी से दूरी बनाए रखने की अपील की है।

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झारखंड में बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष: आंकड़े दे रहे चेतावनी

झारखंड में हाथियों का भटककर शहरी इलाकों में पहुंचना एक गंभीर समस्या बन गया है।

  • मौत के आंकड़े: पिछले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों में हाथियों के हमले में करीब 27 लोगों की जान जा चुकी है।
  • ऐतिहासिक घटनाएं: इससे पहले भी दीपाटोली आर्मी कैंट (2013) और झारखंड विधानसभा के निकट (2024) हाथी देखे जा चुके हैं।
  • सरकार की पहल: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन विभाग को हाथियों के हमले रोकने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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