गिरिडीह में जेएमएम का शक्ति प्रदर्शन, 53वें स्थापना दिवस पर जुटा जनसैलाब

Anand Kumar
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‘वृहद झारखंड’ से लेकर असम चुनाव तक गूंजे राजनीतिक संदेश

Giridih : गिरिडीह में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने 53वें स्थापना दिवस को महज औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में तब्दील कर दिया। जिले के झंडा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में 13 प्रखंडों से हजारों कार्यकर्ता और समर्थक जुटे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि संगठन जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश में है।

जुटान में दिखा जोश, नारों से गूंजा झंडा मैदान
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कार्यकर्ता नगाड़ा बजाते हुए और जोशीले नारों के साथ झंडा मैदान पहुंचे। “शिबू सोरेन जिंदाबाद”, “हेमंत सोरेन जिंदाबाद” और “कल्पना सोरेन जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंजता रहा। इस दौरान संगठन के विभिन्न विंग—युवा, महिला और मजदूर इकाइयों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली, जो इस आयोजन को महज एक समारोह से आगे ले जाकर राजनीतिक ऊर्जा का प्रदर्शन बना रही थी।

दरअसल तारीख बदली, लेकिन संदेश और बड़ा हुआ
दरअसल, झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्थापना दिवस हर साल 4 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन इस बार होली के कारण कार्यक्रम को 30 मार्च को आयोजित किया गया। हालांकि तारीख बदलने के बावजूद आयोजन का पैमाना और संदेश दोनों पहले से अधिक व्यापक नजर आया।

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मंच पर बड़े चेहरे, संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन
कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन, राज्यसभा सांसद सरफराज अहमद, टुंडी विधायक मथुरा महतो और मंत्री हफीजुल हसन अंसारी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इन नेताओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी इस आयोजन को संगठनात्मक एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देख रही है।

शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ आंदोलन की विरासत को याद किया गया
कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड आंदोलन में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देकर की गई। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर राज्य निर्माण के संघर्ष को याद किया, जिससे आयोजन को वैचारिक और ऐतिहासिक आधार भी मिला।

इसी बीच ‘वृहद झारखंड’ की मांग ने खींचा ध्यान
इसी दौरान कार्यकर्ताओं के बीच ‘वृहद झारखंड’ की मांग भी प्रमुख रूप से सामने आई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जिन क्षेत्रों को राज्य गठन के समय झारखंड से बाहर रखा गया, उन्हें अब जोड़ने की पहल होनी चाहिए। यह मांग एक बार फिर क्षेत्रीय अस्मिता और राजनीतिक एजेंडा को केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

मजदूर यूनियन की भागीदारी ने बढ़ाई ताकत
गिरिडीह झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए झंडा मैदान पहुंचे। हरगौरी साहू, तेजलाल मंडल, अर्जुन रवानी, देवचरण दास और चुड़का हांसदा जैसे नेताओं के नेतृत्व में यह जुटान संगठन के श्रमिक आधार की मजबूती का संकेत देता है।

अब नजर असम चुनाव पर, कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
यहीं से कार्यक्रम का राजनीतिक विस्तार असम चुनाव तक जाता नजर आया। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि Hemant Soren के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा असम में बेहतर प्रदर्शन करेगी। यह बयान पार्टी की विस्तारवादी रणनीति और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की मंशा को दर्शाता है।

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सरकार के कामकाज पर भी रखा गया भरोसा
इसके साथ ही कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के कामकाज को लेकर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि Hemant Soren के नेतृत्व में झारखंड विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में राज्य को पूरी तरह विकसित करने की क्षमता इसी नेतृत्व में है।

आगे की राजनीति: संगठन विस्तार और चुनावी संदेश का मेल
फिलहाल, गिरिडीह का यह आयोजन केवल स्थापना दिवस तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह आने वाले चुनावी समीकरणों और संगठनात्मक विस्तार की रणनीति का हिस्सा नजर आता है। एक ओर जहां ‘वृहद झारखंड’ जैसे मुद्दों को फिर से उठाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर असम जैसे राज्यों में राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश भी स्पष्ट दिखाई दे रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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