श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना सराहनीय कदम : मुख्यमंत्री
Jamshedpur : जमशेदपुर के कदमा स्थित मरीन ड्राइव परिसर में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम भव्य आयोजन के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में द्रौपदी मुर्मु ने शिलापट्ट का अनावरण कर केंद्र की आधारशिला रखी। उनके साथ राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति रही।
वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच संपन्न इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। इस अवसर पर सांसद बिद्युत बरन महतो, विधायक सरयू राय तथा विधायक पूर्णिमा साहू सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में टाटा स्टील के सीईओ एवं एमडी टी वी नरेंद्रन भी मौजूद रहे। इसके अलावा ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी एसके बेहरा, ट्रस्टी मनोरंजन दास और श्रीधर प्रधान सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी भागीदारी की।
मुख्यमंत्री का संदेश: संस्थाएं समाज को तराशती हैं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए “जय जगन्नाथ” का उद्घोष किया और कहा कि देश-दुनिया में कई संस्थाएं ऐसी हैं जो केवल संरचना नहीं बनातीं, बल्कि मानव जीवन को भी दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समन्वय की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
मुख्यमंत्री ने ट्रस्ट की सोच और उद्देश्य की प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह केंद्र एक भव्य और जीवंत परिसर के रूप में विकसित होगा, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त करेगा।

इसके पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को झारखंड के एकदिवसीय दौरे पर रांची पहुंचीं, जहां राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनका स्वागत किया। राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
रांची से राष्ट्रपति वायुसेना के हेलीकॉप्टर से जमशेदपुर के सोनारी एयरपोर्ट पहुंचीं। वहां से कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से कदमा स्थित कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुईं
उद्घाटन का प्रतीकात्मक और सांस्कृतिक महत्व
श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र ट्रस्ट द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से ढाई एकड़ भूमि पर आकार लेगी।
- डेढ़ एकड़ में मुख्य मंदिर परिसर
- एक एकड़ में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र
- संरचना पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर
भूमि पूजन के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। राष्ट्रपति ने शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया और मंदिर निर्माण की औपचारिक शुरुआत की।
विश्लेषकों का मानना है कि यह परियोजना जमशेदपुर को धार्मिक पर्यटन के नए मानचित्र पर स्थापित कर सकती है। कोल्हान क्षेत्र में इस पैमाने की धार्मिक-सांस्कृतिक संरचना पहली बार विकसित हो रही है।

युवाओं के विकास को केंद्र में रखकर डिजाइन
ट्रस्ट के अध्यक्ष एस.के. बेहरा ने बताया कि यह केंद्र केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहेगा। यहां युवाओं के लिए नैतिक शिक्षा, सांस्कृतिक प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
गीता और भागवत जैसे ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया जाएगा। 200-250 किलोमीटर के दायरे के शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को यहां आमंत्रित करने की योजना है।
इससे धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक पूंजी निर्माण का प्रयास भी जुड़ा हुआ है।

मेडिकल शिक्षा से भी जुड़ा राष्ट्रपति का कार्यक्रम
कदमा के कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति बारीडीह स्थित मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज पहुंचीं, जहां एक नए भवन का शिलान्यास किया गया और विद्यार्थियों से संवाद हुआ।
यह कार्यक्रम झारखंड में चिकित्सा अवसंरचना के विस्तार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्रीय स्तर पर मेडिकल शिक्षा और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के विकास की दिशा में इसे एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर जमशेदपुर और रांची दोनों शहरों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।
- सोनारी एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक कड़ी निगरानी
- ट्रैफिक डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग
- बैरिकेडिंग और नो-एंट्री व्यवस्था
- पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त तैनाती
रांची एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। वहां से राष्ट्रपति वायुसेना के हेलीकॉप्टर से सोनारी पहुंचीं।
राजनीतिक और सामाजिक आयाम
राष्ट्रपति की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजना में शीर्ष संवैधानिक पद की भागीदारी ने इसे प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा अवसंरचना को लेकर नई पहलें सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा दे सकती है।
सामाजिक-सांस्कृतिक निवेश
जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक निवेश का बड़ा संकेत है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान किया है। अब नजर निर्माण कार्य की प्रगति और निर्धारित समयसीमा पर रहेगी।
यदि लक्ष्य के अनुरूप कार्य पूरा हुआ, तो यह परियोजना कोल्हान क्षेत्र के सांस्कृतिक और शैक्षणिक परिदृश्य को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकती है।