Ranchi : झारखंड में शहरी निकाय चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज है। यह पहला अवसर है जब राज्य के सभी 48 नगर निकायों में एक साथ मतदान कराया जा रहा है। इससे पहले 2018 में 34 नगर निकाय क्षेत्रों में चुनाव हुए थे।
इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं। परिसीमन, वार्ड संरचना, मतदाता सूची और राजनीतिक सक्रियता—सब कुछ अलग है। ऐसे में मतदान प्रतिशत बढ़ाना राज्य निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
पिछले चुनाव का अनुभव: बड़े शहरों में कम वोटिंग
2018 के चुनाव में 34 नगर निकायों में औसत मतदान 65.15% रहा था, लेकिन प्रमुख शहरी केंद्रों में तस्वीर अलग थी।
- बासुकीनाथ नगर पंचायत में सबसे अधिक 76.69% मतदान हुआ था।
- रांची नगर निगम में मात्र 49.3% मतदान दर्ज हुआ।
- धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर जैसे शहरों में भी 50% से कम मतदाता बूथ तक पहुंचे।
रांची नगर निगम का रिकॉर्ड देखें तो:
- 2008: 36% मतदान
- 2013: 38% मतदान
- 2018: 49.3% मतदान
हालांकि यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, लेकिन आधे से ज्यादा मतदाता मतदान से दूर रहे।
23 फरवरी को मतदान, आयोग की चिंता
आगामी 23 फरवरी को होने वाले मतदान में रांची नगर निगम क्षेत्र में 50% से अधिक मतदान सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि इस बार मतदाता जागरूकता अभियान को व्यापक बनाया गया है।
स्कूल–कॉलेज कार्यक्रम, रैलियां, सोशल मीडिया अपील और स्थानीय गतिविधियों के जरिए मतदाताओं को बूथ तक लाने की कोशिश हो रही है।
स्थानीय भाजपा विधायक C. P. Singh और केंद्रीय मंत्री Sanjay Seth ने भी राजधानी के मतदाताओं से मतदान दिवस पर घर से निकलकर वोट देने की अपील की है।
मतदाता उदासीनता की वजहें
शहरी मतदाताओं की कम भागीदारी के पीछे कई कारण गिनाए जाते हैं:
- मतदान केंद्रों की दूरी
- कानून-व्यवस्था को लेकर आशंका
- नौकरीपेशा वर्ग का निर्वाचन ड्यूटी में बाहर होना
- संभ्रांत और मध्यमवर्गीय परिवारों की मतदान में कम दिलचस्पी
इसके अलावा इस बार ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान होगा। प्रत्येक मतदाता को दो बैलेट पेपर मिलेंगे। मुहर लगाने और बैलेट बॉक्स में डालने की प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, जिससे मतदान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
आयोग के सामने असली परीक्षा
राज्य निर्वाचन आयोग के लिए यह चुनाव सिर्फ प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि शहरी लोकतंत्र की सक्रियता की परीक्षा है। यदि राजधानी और प्रमुख नगर निगम क्षेत्रों में 50% से अधिक मतदान होता है, तो इसे सकारात्मक संकेत माना जाएगा।
अन्यथा, यह सवाल फिर उठेगा कि जिन शहरी क्षेत्रों को सर्वाधिक सुविधाएं चाहिए, वहीं के मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूरी क्यों बना लेते हैं।