विजय पांडेय : संघर्ष से सफलता की कहानी, Sarpanch Sahab से मंज़िल की ओर

Anand Kumar
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अमरनाथ, मुंबई: सपनों का पीछा करने वालों के लिए समय पर लक्ष्य का पता चल जाना किसी वरदान से कम नहीं होता। अभिनेता विजय पांडेय उन्हीं विरले लोगों में हैं जिन्हें युवा अवस्था में ही अपने गंतव्य का आभास हो गया था। पटना की गलियों से शुरू हुआ उनका यह सफर आज मुंबई की मायानगरी में एक सधे हुए अभिनेता के रूप में पहचान बना चुका है।
पटना के कालिदास रंगालय में अभिनय से उनका पहला परिचय हुआ। कॉलेज के दिनों में साइकिल से आते-जाते उन्होंने नाटकों की दुनिया को पहली बार नज़दीक से देखा। विजय बताते हैं, “एक दिन एक दोस्त मुझे रंगालय ले गया और जैसे ही मैं उस मंचीय वातावरण में पहुंचा, मैं मंत्रमुग्ध हो गया। उस दिन मेरे भीतर अभिनय का कीड़ा जागा और तब से वह मेरे भीतर ही है—हर दिन मुझे काटता रहता है।
पटना दूरदर्शन और फिर ETV बिहार में काम करते हुए उन्होंने अभिनय के साथ-साथ तकनीकी पहलुओं जैसे स्क्रिप्टिंग, एडिटिंग, कैमरा और प्रोडक्शन का भी गहन अनुभव प्राप्त किया। सीमित संसाधनों में बहु-भूमिकाएं निभाने से उन्हें रचनात्मक दृष्टि और व्यावहारिक ज्ञान दोनों मिला।
एनएसडी में दाखिला भले न मिल सका, लेकिन विजय ने हार नहीं मानी। मीडिया की दुनिया में अनुभव अर्जित करने के बाद वे मुंबई पहुंचे, जहां एक लंबा संघर्ष उनका इंतज़ार कर रहा था। वे कहते हैं- “मुंबई में आप संघर्ष नहीं करते, आपसे संघर्ष करवाया जाता है,” । छोटे-मोटे किरदार, रिजेक्शन, कटे हुए सीन और डब्बाबंद फिल्में—ये सब 15 साल के सफर का हिस्सा रहे।
नेटफ्लिक्स की सीरीज़ Khaki: The Bihar Chapter में ‘वकील सिंह’, MX Player की Purvanchal Diaries में एक निगेटिव रोल और Tamanchay जैसी फिल्मों से उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। और फिर आया टर्निंग पॉइंट—Sarpanch Sahab। इस सीरीज़ में उन्हें निर्देशक शाहिद खान और कास्टिंग डायरेक्टर साबिर अली ने मौका दिया। वरिष्ठ कलाकारों जैसे विनीत कुमार, नीरज सूद, सुनीता रजवार, अनुध सिंह ढाका और युक्ति कपूर के साथ काम करने का अनुभव उनके लिए प्रेरणादायक रहा। पारिवारिक मूल्यों से जुड़ी यह सीरीज़ अश्लीलता से परे एक सामाजिक दस्तावेज़ जैसी है।
कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल ‘Golden Moments With Vijay Pandey’ शुरू किया, जहां वे फिल्मों और फिल्मी हस्तियों पर अपने नजरिए से सामग्री प्रस्तुत करते हैं। यह चैनल धीरे-धीरे लोकप्रिय हुआ और एक नया मंच बन गया उनके सिने प्रेम के लिए।
विजय पांडेय का अब तक का सफर यह बताने के लिए काफी है कि मेहनत, धैर्य और जुनून के साथ कोई भी सपना साकार हो सकता है। अभिनय उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है—और यही पुकार उन्हें निरंतर आगे ले जा रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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