JSSC CGL समेत 4 परीक्षाओं से नियुक्त अभ्यर्थियों को राहत, नौकरी रहेगी बरकरार, CID को 48 घंटे में देनी होगी जांच रिपोर्ट

Anand Kumar
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रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC CGL समेत चार परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से 18 अगस्त को जारी उस आदेश पर रोक बरकरार रखी है, जिसके तहत संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने और इनके आधार पर हुई नियुक्तियों को समाप्त करने का फैसला लिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन परीक्षाओं से नियुक्त अभ्यर्थी फिलहाल अपने पदों पर बने रहेंगे।

मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। इसी दिन JPSC सिविल सेवा परीक्षा, CDPO और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) नियुक्ति से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई निर्धारित है।

CID जांच रिपोर्ट 48 घंटे में कोर्ट में होगी पेश

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत से CID की जांच रिपोर्ट दाखिल करने और जवाबी शपथ पत्र पेश करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए 48 घंटे के भीतर जवाब और जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार से CID की जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा था। अदालत यह जानना चाहती थी कि आखिर किन तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर सरकार ने चार परीक्षाओं को रद्द करने और उनसे हुई नियुक्तियों को समाप्त करने का फैसला लिया।

अब CID की जांच में सामने आए तथ्यों के साथ सरकार का पक्ष अदालत के समक्ष रखा जाएगा।

नियुक्त अभ्यर्थियों को नहीं हटाया जाएगा

इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार के 18 अगस्त के आदेश पर रोक लगाते हुए इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अभ्यर्थियों को तत्काल राहत दी थी।

अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि नियुक्त अभ्यर्थियों को हटाने की कार्रवाई में नैसर्गिक न्याय (Principles of Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया प्रतीत होता है। इसी आधार पर कोर्ट ने निर्देश दिया था कि संबंधित पदों पर काम कर रहे नियुक्त अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक उनके पदों से नहीं हटाया जाए।

अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा था कि CID की अब तक की जांच में ऐसा क्या सामने आया है, जिसके आधार पर इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियों को रद्द करने जैसा कठोर फैसला लिया गया।

किन चार परीक्षाओं पर है विवाद?

मामला झारखंड की चार प्रमुख भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है। इनमें—

  • JSSC CGL परीक्षा
  • JPSC 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा
  • खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) परीक्षा
  • CDPO भर्ती परीक्षा

शामिल हैं।

राज्य सरकार ने इन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके बाद इन परीक्षाओं के आधार पर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भी प्रभावित हुईं। सरकार के फैसले के खिलाफ नियुक्त अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

TDPL की भूमिका की जांच के बाद सरकार ने लिया फैसला

राज्य सरकार ने जिन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है, उनमें TDPL की कथित भूमिका जांच के दायरे में रही है। सरकार का निर्णय इसी जांच से जुड़े तथ्यों और निष्कर्षों पर आधारित बताया गया है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल नियुक्त अभ्यर्थियों को हटाने के आदेश पर रोक लगा रखी है। अब अदालत के सामने CID की जांच रिपोर्ट और राज्य सरकार का जवाब आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन नियुक्तियों और परीक्षाओं को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

18 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उस दिन अदालत CID की जांच रिपोर्ट और सरकार के जवाब के आधार पर मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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