नई दिल्ली। झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और दिशोम गुरु के नाम से विख्यात स्वर्गीय शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में उनकी पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी उपस्थित रहीं।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिबू सोरेन को सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित करते हुए कहा कि वे भारत के अग्रणी आदिवासी नेताओं, समाज सुधारकों और झारखंड आंदोलन के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी अधिकारों, सामाजिक न्याय तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संघर्ष को समर्पित किया।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने श्री शिबू सोरेन को, मरणोपरांत, लोक कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय श्री सोरेन भारत के प्रमुख आदिवासी जननेता, समाज सुधारक तथा झारखंड आंदोलन के मुख्य शिल्पकारों में से एक… pic.twitter.com/cNCYtH2Wmy
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 23, 2026
राष्ट्रपति ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा कि शिबू सोरेन ने ऐतिहासिक ‘धान कटनी आंदोलन’ का नेतृत्व किया, जो महाजनी व्यवस्था के खिलाफ आदिवासी भूमि अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन बना। उन्होंने बांध, खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से विस्थापित आदिवासी समुदायों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया।
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सम्मान ग्रहण करते समय रूपी सोरेन भावुक नजर आईं। उन्होंने इसे पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के लिए गर्व का क्षण बताया। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक नेताओं ने भी दिशोम गुरु के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर कहा कि पद्म भूषण सम्मान दिशोम गुरु के आजीवन संघर्ष, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण को दिया गया सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन संघर्षों, मूल्यों और सपनों का सम्मान है, जिनके लिए शिबू सोरेन जीवनभर अडिग होकर खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और झारखंड के हक-अधिकारों की लड़ाई में दिशोम गुरु का नेतृत्व ऐतिहासिक, अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों, शोषितों, आदिवासियों और मेहनतकश समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित किया।
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड अलग राज्य आंदोलन से लेकर देशभर के आदिवासी, दलित और वंचित समुदायों के संघर्षों को दिशा देने में शिबू सोरेन की भूमिका प्रेरणादायी रही है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण, शिक्षा के प्रसार और समाज को संगठित करने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश ने पद्म भूषण सम्मान के माध्यम से दिशोम गुरु के योगदान को नमन किया है, लेकिन झारखंड सहित देशभर के करोड़ों लोगों के दिलों में उनका स्थान सदैव सर्वोच्च रहेगा।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा, “हमारे लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे।”
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