Chaibasa : झारखंड के नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल में एक बार फिर आईईडी विस्फोट की घटना सामने आई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। छोटानागरा थाना क्षेत्र के बालिबा गांव के समीप चडरा डेरा जंगल में सोमवार को उस समय जोरदार धमाका हुआ, जब कोबरा 205 बटालियन के जवान नियमित सर्च ऑपरेशन पर निकले हुए थे। विस्फोट में जवान अनुज कुमार घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची एयरलिफ्ट किया जा रहा है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पिछले सात महीनों के भीतर सारंडा क्षेत्र में आईईडी धमाकों की श्रृंखला लगातार सामने आ रही है, जिससे यह इलाका एक बार फिर हाई रिस्क जोन के रूप में उभर रहा है।
सर्च ऑपरेशन के दौरान अचानक धमाका
जानकारी के अनुसार सुरक्षा बलों की टीम नक्सल विरोधी अभियान के तहत इलाके में कॉम्बिंग कर रही थी। इसी दौरान चडरा डेरा जंगल में अचानक तेज विस्फोट हुआ। विस्फोट की चपेट में आकर कोबरा जवान अनुज कुमार घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य जवानों ने तत्काल मोर्चा संभाला और पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया।
बताया जा रहा है कि विस्फोट इतना अचानक था कि जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला, हालांकि त्वरित प्रतिक्रिया के कारण बड़ा नुकसान टल गया।
यह भी पढ़ें – Saranda Encounter: सारंडा के जंगलों में नक्सलियों से भीषण मुठभेड़, IED ब्लास्ट में सहायक कमांडेंट घायल, रांची एयरलिफ्ट
पैर में स्प्लिंटर, हालत स्थिर
घायल जवान के पैर में स्प्लिंटर लगा है, जिससे उन्हें हल्की चोट आई है। राहत की बात यह है कि उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं। घटनास्थल पर ही प्राथमिक उपचार देने के बाद उन्हें एहतियातन बेहतर इलाज के लिए रांची भेजा जा रहा है।
IED की प्रकृति पर सस्पेंस, जांच जारी
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विस्फोट पहले से लगाया गया प्रेशर आईईडी था या हाल ही में नक्सलियों द्वारा प्लांट किया गया था। बम निरोधक दस्ते और तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया है, जो विस्फोट के प्रकार और उसके स्रोत की जांच कर रही हैं।
इलाके में हाई अलर्ट, तेज हुआ कॉम्बिंग अभियान
घटना के बाद पूरे सारंडा जंगल क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा बलों द्वारा आसपास के इलाकों में सघन कॉम्बिंग अभियान चलाया जा रहा है। जंगल के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां इस आशंका से भी इनकार नहीं कर रही हैं कि नक्सली किसी बड़े हमले की योजना बना रहे हों, जिसके तहत आईईडी बिछाए गए हों।

सात महीनों में लगातार धमाके, बढ़ी चुनौती
सारंडा क्षेत्र में पिछले सात महीनों के भीतर कई आईईडी विस्फोट की घटनाएं हो चुकी हैं, जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
- 10 अक्टूबर 2025: सर्च ऑपरेशन के दौरान आईईडी विस्फोट, CRPF के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर शहीद, दो अधिकारी घायल
- 28 नवंबर 2025: जराईकेला क्षेत्र में ब्लास्ट, एक महिला की मौत, दो ग्रामीण घायल
- दिसंबर 2025: बालिबा क्षेत्र में दो विस्फोट, कोबरा बटालियन के जवान घायल
- जनवरी 2026: दो अलग-अलग घटनाओं में नाबालिग बच्चियों की मौत
- 11 फरवरी 2026: दो ग्रामीणों की जान गई
- 21 फरवरी 2026: सर्च ऑपरेशन के दौरान दो जवान घायल
- 18 मार्च 2026: CRPF के सब-इंस्पेक्टर घायल
- 22 मार्च 2026: छोटानागरा में सब-इंस्पेक्टर सुनील कुमार मंडल की मौत
- 6 अप्रैल 2026: ताजा घटना में कोबरा जवान अनुज कुमार घायल
इन घटनाओं से साफ है कि नक्सली लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आईईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें – सारंडा जंगल में आईईडी ब्लास्ट, कोबरा के दो जवान घायल, नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज
सुरक्षा रणनीति पर उठे सवाल
लगातार हो रहे आईईडी हमलों ने सुरक्षा रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं, लेकिन घने जंगल, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय नेटवर्क नक्सलियों को बढ़त दिलाते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईईडी हमले नक्सलियों की “लो-कॉस्ट, हाई-इंपैक्ट” रणनीति का हिस्सा हैं, जिससे वे कम संसाधनों में अधिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
आगे की चुनौती
सारंडा जैसे संवेदनशील इलाके में सुरक्षा बलों के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर नक्सलियों की गतिविधियों पर लगाम लगाना और दूसरी ओर स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। ताजा घटना ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में सतर्कता और ऑपरेशन की तीव्रता बढ़ाने की जरूरत है।