सरंडा जंगल के कठिन जीवन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से टूटा मनोबल, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी आर्थिक मदद

भुवनेश्वर। झारखंड के एक 18 वर्षीय माओवादी ने मंगलवार को ओडिशा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी की पहचान उम्बलन होनहागा उर्फ प्रभु के रूप में हुई है, जो भाकपा (माओवादी) के स्थानीय गुरिल्ला दस्ते (LGSM) का सदस्य था।
सरंडा क्षेत्र से जुड़ा रहा माओवादी नेटवर्क
अधिकारी के अनुसार, प्रभु झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र स्थित हलामूली गांव का निवासी है। उसका गांव सरंडा आरक्षित वन के भीतर आता है, जहां नक्सली अक्सर किराने का सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं जुटाने के लिए आते-जाते रहते थे।
विचारधारा और जंगल के जीवन से मोहभंग
पश्चिमी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक बृजेश राय ने बताया,“2024 में उसे संगठन में भर्ती किया गया था। लेकिन समय के साथ वह संगठन की विचारधारा और जंगल के कठिन जीवन से विमुख हो गया। इसके अलावा, सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे तलाशी अभियानों से उसमें भय का भाव पैदा हुआ, जिससे वह आत्मसमर्पण पर विचार करने को विवश हुआ।”
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी आर्थिक सहायता
डीआईजी ने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद प्रभु को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत 2.64 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, वह 25,000 रुपये के एकमुश्त विवाह प्रोत्साहन का भी पात्र होगा।अधिकारियों के अनुसार, उसे तय मानकों के अनुसार अन्य सरकारी लाभ भी प्रदान किए जाएंगे, ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू कर सके। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण यह दर्शाते हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई और पुनर्वास नीतियां असर दिखा रही हैं, जिससे युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।