रूपी सोरेन का निधन: शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी और हेमंत सोरेन की मां ने ली अंतिम सांस, राष्ट्रपति भवन में पति का सम्मान लेने पहुंची थीं

Anand Kumar
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रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का बुधवार को निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहीं रूपी सोरेन का इलाज रांची के हिल व्यू अस्पताल में चल रहा था। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने रूपी सोरेन के निधन की पुष्टि की है। उनके निधन की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झारखंड सरकार के कई मंत्री और झामुमो के नेता अस्पताल पहुंचे।

18 सितंबर को सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती

रूपी सोरेन को 18 सितंबर को सांस लेने में परेशानी होने के बाद रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी हालत में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहा।

बताया गया कि उनके शरीर के कई अंग प्रभावित हुए थे। गंभीर स्थिति में उन्हें कई बार वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी रखा गया। 6 अक्टूबर को उनके स्वास्थ्य में कुछ सुधार की खबर आई थी, लेकिन 7 अक्टूबर को अचानक उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें तत्काल वेंटिलेटर पर रखा गया।

इससे पहले उन्हें इलाज के लिए हैदराबाद के एक अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। वहां से लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई थी।

पति शिबू सोरेन के निधन के बाद लगातार बिगड़ती गई तबीयत

रूपी सोरेन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिबू सोरेन के संघर्षों के बीच बिताया। वर्ष 1962 में शिबू सोरेन के साथ उनका विवाह हुआ था। शादी से पहले उनका नाम रूपी किस्कू था।

उन्होंने शिबू सोरेन के संघर्ष के दौर में परिवार को संभाला और अपने बच्चों की परवरिश की। उनके चार बच्चे रहे—दिवंगत दुर्गा सोरेन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन और अंजनी सोरेन।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद से ही रूपी सोरेन की तबीयत खराब रहने लगी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समय-समय पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद और दिल्ली भी ले जाते रहे।

राष्ट्रपति भवन में पति का सम्मान लेने पहुंची थीं रूपी सोरेन

रूपी सोरेन की सार्वजनिक जिंदगी की सबसे भावुक तस्वीर इसी साल सामने आई थी।

शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर पहुंची थीं और उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों अपने पति का सम्मान ग्रहण किया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झुककर रूपी सोरेन के हाथों में पद्म भूषण सौंपा था। उस समय राष्ट्रपति भवन का पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था।

यह तस्वीर शिबू सोरेन के दशकों लंबे राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष में रूपी सोरेन की भूमिका की भी याद दिलाती है।

रूपी सोरेन के निधन पर नेताओं ने जताया शोक

रूपी सोरेन के निधन पर झारखंड के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक जताया है।

जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माताजी के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि रूपी सोरेन अपने पीछे भरा-पूरा परिवार और मां जैसा स्नेह पाने वाले हजारों लोगों की यादें छोड़ गई हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी रूपी सोरेन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने शिबू सोरेन के साथ झारखंड आंदोलन के दौर की पुरानी यादों को याद करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

विधायक जयराम महतो ने कहा कि रूपी सोरेन जी के निधन का दुःखद समाचार पीड़ादायक है। इस अत्यंत दुःखद और भावुक क्षण में मेरी गहरी संवेदनाएँ एवं सहानुभूति शोकाकुल सोरेन परिवार के साथ हैं. पिता के बाद मां का भी साया उठ जाना जीवन की ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं।

कैबिनेट की बैठक स्थगित

रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद झारखंड सरकार ने प्रोजेक्ट भवन में प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक स्थगित कर दी है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के निधन से झामुमो और पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।

रूपी सोरेन ने एक ऐसे परिवार की नींव को मजबूती से संभाले रखा, जिसने झारखंड आंदोलन से लेकर राज्य की सत्ता तक का लंबा राजनीतिक सफर तय किया। शिबू सोरेन के संघर्ष के दिनों में परिवार को संभालने से लेकर राष्ट्रपति भवन में पति का पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करने तक, उनका जीवन झारखंड की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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