रांची/धनबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रांची जोनल कार्यालय ने धनबाद के रंगदारी और अवैध कोयला खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। 28 जुलाई 2026 की सुबह 6:30 बजे शुरू हुआ यह छापेमारी अभियान देर रात तक चला, जिसमें कोयला व्यापारियों और उनके सहयोगियों के 31 ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इस कार्रवाई के दौरान ED ने ₹160 करोड़ से अधिक के म्यूचुअल फंड व वित्तीय निवेश को फ्रीज कर दिया है, जबकि ₹1.02 करोड़ की बेहिसाबी नकदी जब्त की गई है। इसके अलावा 200 से अधिक अचल संपत्तियों (जमीन, मकान, फ्लैट) के सेल डीड और भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
बेनामी संपत्ति का बड़ा नेटवर्क, 200 करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति का अनुमान
ED की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अवैध कोयला खनन, चोरी के कोयले की तस्करी और कोयला उठाव में रंगदारी से अर्जित अवैध कमाई को सफेद करने (वैध दिखाने) के लिए विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया था।
- बेनामी संपत्तियां: छापेमारी में मिले 200 से ज्यादा सेल डीड के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि कोयला व्यापारियों ने ज्यादातर अचल संपत्तियां दूसरों के नाम पर (बेनामी) खरीदी थीं।
- मूल्यांकन जारी: ED अधिकारियों के अनुसार, इन अचल संपत्तियों का कुल मूल्य ₹200 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसका सटीक मूल्यांकन फिलहाल जारी है।
- वित्तीय संस्थानों को निर्देश: फ्रीज किए गए ₹160 करोड़ के म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों की बिक्री या ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए ED ने संबंधित वित्तीय संस्थानों को औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं।
किनके ठिकानों पर हुई छापेमारी?
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई। मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यक्तियों, उनके सहयोगियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के परिसरों को खंगाला गया:
- मुख्य नाम: अनिल गोयल, एल.बी. सिंह, हरेंद्र चौहान और CA डी.एन. सिन्हा। (चल-अचल संपत्तियों के सबसे अधिक दस्तावेज एल.बी. सिंह के करीबियों के ठिकानों से मिले हैं।)
- जांच के दायरे में शामिल अन्य लोग: गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव और माधो सिंह।
डिजिटल साक्ष्य और डिलीटेड डेटा की रिकवरी
ED की टीमों ने छापों के दौरान मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, खाताबही और कई अहम वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।
- डेटा रिकवरी: कई डिजिटल डिवाइसेस से डिलीट किए जा चुके डेटा को रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
- आगे का विश्लेषण: अगले एक-दो दिनों में डेटा रिकवर कर उसका गहन विश्लेषण शुरू किया जाएगा, जिससे इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
पुलिस FIR के आधार पर जांच, पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
ED के अनुसार, यह जांच झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR और अदालतों में दाखिल चार्जशीटों के आधार पर शुरू की गई थी।
इससे पहले, नवंबर 2025 में भी अनिल गोयल, एल.बी. सिंह और उनसे जुड़े नेटवर्क पर ED ने छापेमारी की थी। ED का कहना है कि ताजा कार्रवाई में मिले नए और ठोस सबूतों के आधार पर अब इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का दायरा और व्यापक किया जाएगा।
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