Operation Megaburu : सारंडा में 48 घंटे की जंग, 18 नक्सली मारे गये, 2.35 करोड़ का इनामी अनल समेत टॉप लीडर खत्म

Anand Kumar
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पेड़ों की ओट से फायरिंग करते पुलिस के जवान।

झारखंड में माओवादियों के कोर और टॉप लीडरशिप पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार

Chaibasa : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान सामने आया है। ऑपरेशन मेगाबुरू (Operation Megaburu) के तहत सुरक्षा बलों ने पिछले 48 घंटों में 18 नक्सलियों को मार गिराया है। इस भीषण मुठभेड़ में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व का सफाया होना नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कुमडीह के जंगलों में दूसरे दिन भी थर्राया इलाका

कुमडीह गांव के पास स्थित घने जंगलों में शुक्रवार को भी रुक-रुक कर फायरिंग होती रही, जिससे पूरा इलाका दहशत में रहा। यह ऑपरेशन इसलिए ऐतिहासिक बन गया है क्योंकि इसमें माओवादियों के कोर और टॉप लीडरशिप को सीधे निशाना बनाया गया।

गुरुवार सुबह छोटानगरा थाना क्षेत्र के कुमडीह गांव के समीप हुई पहली मुठभेड़ में ही 16 माओवादी पुलिस की गोली का निशाना बन गये थे। शुक्रवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई फायरिंग में हार्डकोर नक्सली रापा मुंडा और एक महिला माओवादी को भी मार गिराया गया, जिससे कुल मृतकों की संख्या 18 हो गई।

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2.35 करोड़ के इनामी टॉप लीडर अनल समेत कई बड़े नाम ढेर

Operation Megaburu में मारे गए नक्सलियों में 2.35 करोड़ रुपये का इनामी कुख्यात माओवादी नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी शामिल है, जिसे 100 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड माना जाता था। अनल पर झारखंड में 1 करोड़, ओडिशा में 1 करोड़ 20 लाख और एनआईए की ओर से 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

Operation Megaburu

इसके अलावा मारे गए नक्सलियों में अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, राजेश मुंडा, बुलबुल अयदा, बबीता, पूर्णिमा और सुरजमुनी जैसे संगठन के सक्रिय और बड़े चेहरे शामिल हैं। पुलिस के अनुसार अब तक 14 नक्सलियों की औपचारिक पहचान हो चुकी है।

एक से डेढ़ किलोमीटर में बिखरे हैं शव

घटनास्थल का मंजर बेहद भयावह बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार मुठभेड़ इतनी तीव्र थी कि मारे गए नक्सलियों के शव घने जंगल में लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग स्थानों पर बिखरे पड़े हैं

शुक्रवार को जब सुरक्षा बल शवों को बाहर निकालने के लिए ट्रैक्टरों के साथ मौके पर पहुंचे, तभी जंगल में छिपे अन्य माओवादियों ने अचानक दोबारा गोलीबारी शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित फायरिंग के चलते फिलहाल शवों को बाहर लाने और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को टालना पड़ा।

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जंगल में अब भी छिपे होने की आशंका

चाईबासा सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल टीम गठित कर दी गई थी, लेकिन दोपहर करीब 12 बजे फिर शुरू हुई मुठभेड़ ने पूरी योजना बाधित कर दी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जंगल में अब भी कुछ सशस्त्र माओवादी छिपे हो सकते हैं, जो अपने मारे गए साथियों के शवों के पास घेराबंदी कर फायरिंग कर रहे हैं।

4000 जवान, हेलीकॉप्टर और हाईटेक निगरानी

कुमडीह से सटे करीब 12 किलोमीटर इलाके में कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के लगभग 4000 जवानों ने चारों ओर से घेराबंदी कर रखी है। अभियान में तीन हेलीकॉप्टर, नाइट विजन हाई-रेंज ड्रोन और सैटेलाइट मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया गया। कुछ चरणों में हेलीकॉप्टर से फायरिंग की भी पुष्टि हुई है।

Operation Megaburu

अनुरंजन किस्पोट्टा, कोल्हान के डीआईजी ने स्पष्ट किया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा और जब तक सारंडा व कोल्हान क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो जाता, अभियान रोका नहीं जाएगा।

अब टॉप लीडर मिसिर बेसरा पर नजर

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में अब भी माओवादी संगठन के कुछ बड़े नेता सक्रिय हो सकते हैं। इनमें संगठन का टॉप लीडर मिहिर (मिसिर) बेसरा, अनमोल, मोछु सहित असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटु लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन और जयकांत शामिल हैं।

ऑपरेशन मेगाबुरू (Operation Megaburu) को नक्सल प्रभावित झारखंड में संगठन की रीढ़ तोड़ने वाला निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जिसने माओवादी नेतृत्व को सीधा और गहरा झटका दिया है।

कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने कहा कि इलाके में सर्च अभियान जारी रहेगा और नक्सल नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने तक कार्रवाई रुकेगी नहीं।

अब तक की बड़ी कार्रवाई एक नजर में

  • सरायकेला-खरसावां से 1 करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस की गिरफ्तारी
  • 1 करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य सुधाकर का तेलंगाना में सरेंडर
  • अप्रैल 2025 में 1 करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक मुठभेड़ में ढेर
  • जून 2025 में टोंटो और गोइलकेरा में अलग-अलग मुठभेड़ों में चार नक्सली ढेर
  • सितंबर 2025 में हजारीबाग में 1 करोड़ के इनामी अनुज उर्फ सहदेव सोरेन मारा गया
  • 22 जनवरी 2026 को सारंडा में 1 करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी ढेर

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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