Ramgarh : झारखंड के प्रसिद्ध शक्तिपीठ, रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वर्दीधारी पुलिसकर्मी निहत्थे श्रद्धालुओं पर लाठियां बरसाते नजर आ रहे थे। इस मामले ने जैसे ही तूल पकड़ा, रामगढ़ पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषी जवानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
वायरल वीडियो और पुलिस की बर्बरता
बीते दिनों रजरप्पा मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने आपा खो दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सुरक्षा में तैनात जवान श्रद्धालुओं के साथ न केवल धक्का-मुक्की कर रहे हैं, बल्कि उन पर लाठियों से प्रहार भी कर रहे हैं। मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर, जहाँ लोग शांति और भक्ति की तलाश में आते हैं, वहां इस तरह का हिंसक व्यवहार पुलिस की छवि को धूमिल करने वाला था।
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर वायरल हुआ, आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने झारखंड पुलिस और स्थानीय प्रशासन को टैग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
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रामगढ़ एसपी की त्वरित संज्ञान और स्थल जांच
मामले की गंभीरता और सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए रामगढ़ पुलिस अधीक्षक (SP) अजय कुमार स्वयं रजरप्पा मंदिर पहुंचे। उन्होंने न केवल वायरल वीडियो के दृश्यों का मिलान घटनास्थल से किया, बल्कि वहां मौजूद अन्य चश्मदीदों और मंदिर समिति के सदस्यों से भी पूछताछ की। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार संयम और अनुशासन की सीमाओं से बाहर था।
एसपी अजय कुमार ने मौके पर ही सख्त निर्देश दिए कि आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनका सम्मान सबसे ऊपर है। पुलिस का काम व्यवस्था बनाना है, न कि श्रद्धालुओं के बीच भय पैदा करना।
कड़ी विभागीय कार्रवाई: 5 जवान निलंबित
जांच रिपोर्ट और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर एसपी ने तत्काल प्रभाव से 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित होने वाले जवानों में शामिल हैं:
- आरक्षी श्याम लाल महतो (सैट-112, रजरप्पा कैंप)
- आरक्षी राधेश्याम कुजूर (जैप-04, बोकारो)
- आरक्षी बहादुर उरांव (जैप-04, बोकारो)
- आरक्षी जॉनसन सुरीन (जैप-04, बोकारो)
- एक होमगार्ड जवान
इन सभी को तत्काल ड्यूटी से हटाकर इनका मुख्यालय झारखंड सशस्त्र पुलिस-04, बोकारो निर्धारित कर दिया गया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इनके खिलाफ विधिवत आरोप-प्रारूप तैयार कर विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
अनुशासन और सुरक्षा पर प्रशासन का रुख
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। रामगढ़ एसपी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के दौरान शालीनता और धैर्य अनिवार्य है। रजरप्पा मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु देश-दुनिया से आते हैं। ऐसे में पुलिस बल को ‘मित्र पुलिस’ की भूमिका निभानी चाहिए, न कि दमनकारी बल की।
प्रशासन ने मंदिर परिसर में तैनात अन्य सभी सुरक्षाकर्मियों को भी ब्रीफिंग दी है कि भविष्य में अगर किसी भी स्तर पर श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता या अनावश्यक बल प्रयोग की शिकायत मिलती है, तो संबंधित कर्मियों को सेवा से बर्खास्त करने तक की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
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विश्वास की बहाली जरूरी
रजरप्पा मंदिर की इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बलों का व्यवहार कैसा होना चाहिए। रामगढ़ एसपी की इस त्वरित कार्रवाई ने जनता के बीच प्रशासन के प्रति खोए हुए विश्वास को बहाल करने की कोशिश की है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई से अन्य पुलिसकर्मियों को भी यह सीख मिलेगी कि वर्दी का रौब दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए है।