रामगढ़ में बंद खदान बना मौत का कुआं : जहरीली गैस की चपेट में आकर चार युवकों की मौत

Anand Kumar
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रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। गिद्दी-रामगढ़ सीमावर्ती वन क्षेत्र स्थित एक बंद खदान में जहरीली गैस के रिसाव से चार युवकों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि खदान के भीतर उत्खनन के दौरान एक युवक अचानक गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए अंदर उतरे तीन अन्य युवक भी जहरीले वातावरण में फंस गए और सभी की जान चली गई।

मृतकों की पहचान आशीष रजवार (25), किशोर रवानी (35), देवा कुमार बेदिया (25) और डब्लू बेदिया (30) के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खदान के अंदर काम के दौरान अचानक गैस का प्रभाव बढ़ गया। सबसे पहले एक युवक बेहोश होकर गिर पड़ा। उसके साथ मौजूद अन्य तीन युवक उसे बाहर निकालने और बचाने के उद्देश्य से अंदर गए, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। कुछ ही देर में चारों की स्थिति गंभीर हो गई।

घटना की जानकारी वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने ग्रामीणों को दी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस प्रशासन को भी सूचना दी गई, जिसके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

एक घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सीसीएल की नईसराय माइंस रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। 14 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची, जिसमें से सात प्रशिक्षित सदस्य विशेष सुरक्षा उपकरणों के साथ खदान के भीतर उतरे। लगभग एक घंटे तक चले अभियान के बाद चारों युवकों को बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू टीम द्वारा बाहर लाए जाने के बाद सभी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने दो युवकों को अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

चार युवकों की मौत के बाद स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। वहां मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। मृतकों के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे, जहां शोकाकुल माहौल बना रहा।

प्रशासन ने सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि होगी, हालांकि शुरुआती जांच में जहरीली गैस के रिसाव को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

बंद खदानों की सुरक्षा पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की कई बंद खदानों में लंबे समय से गैस जमा होने और सुरक्षा व्यवस्था की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि ऐसी खदानों में अवैध गतिविधियां भी होती हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है।

यह घटना एक बार फिर बंद और परित्यक्त खदानों की निगरानी, सुरक्षा प्रबंधन तथा अवैध प्रवेश रोकने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों में मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसों का जमाव जानलेवा साबित हो सकता है।

हादसे के बाद जांच की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि बंद खदानों की नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाती तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।

रामगढ़ की यह त्रासदी केवल चार परिवारों का व्यक्तिगत नुकसान नहीं है, बल्कि यह खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी की वास्तविक स्थिति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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