बिहार का सीएम पद छोड़ सकते हैं नीतीश, बीजेपी का सीएम औऱ निशांत हो सकते हैं डिप्टी सीएम
Jan-Man Desk Patna : बिहार की राजनीति में इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस संभावना का न तो आधिकारिक खंडन किया गया है और न ही पुष्टि की गई है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी आज शाम 6 बजे तक अपने दोनों राज्यसभा प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर सकती है। इस संभावित घोषणा से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना लगभग तय
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
दूसरे उम्मीदवार के तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम चर्चा में है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार इस विषय पर गहन विचार-मंथन कर रहे हैं।
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इसी बीच पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा दिल्ली से पटना पहुंच चुके हैं, जिससे संकेत मिल रहा है कि पार्टी नेतृत्व अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तीन संभावित राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक हलकों में मौजूदा स्थिति को देखते हुए तीन संभावित परिदृश्य सामने आ रहे हैं।
पहला परिदृश्य: नीतीश कुमार राज्यसभा जाएं
इस संभावना में चर्चा यह है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि मुख्यमंत्री पद पर भाजपा अपना दावा पेश कर सकती है।
दूसरा परिदृश्य: निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री
दूसरी संभावना यह बताई जा रही है कि निशांत कुमार को राज्यसभा भेजकर उनकी औपचारिक राजनीतिक एंट्री करवाई जाए। अब तक वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं।
तीसरा परिदृश्य: दूसरे नाम पर सहमति नहीं
तीसरा परिदृश्य यह माना जा रहा है कि रामनाथ ठाकुर के नाम पर सहमति बनने के बाद दूसरे उम्मीदवार को लेकर अभी पार्टी के भीतर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है, इसलिए विभिन्न नाम चर्चा में आ रहे हैं।
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मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा पर चिराग पासवान का बयान
बिहार में मुख्यमंत्री बदले जाने की अटकलों के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने इन चर्चाओं को खारिज किया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई स्थिति नहीं है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में सरकार सुचारु रूप से चल रही है और एनडीए का गठबंधन मजबूत है।
चिराग पासवान ने यह भी कहा कि 200 से अधिक सीटों के समर्थन के साथ बिहार में सरकार स्थिर है और मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं है।
अगर निशांत कुमार राज्यसभा जाते हैं तो इसके बड़े संकेत
उत्तराधिकार की राजनीति पर असर
नीतीश कुमार 76 वर्ष की उम्र में प्रवेश कर चुके हैं और समय-समय पर उनके स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा होती रही है। ऐसे में पार्टी के भीतर और बाहर उनके संभावित उत्तराधिकारी को लेकर सवाल उठते रहते हैं।
JDU कार्यालय के बाहर कई बार ऐसे पोस्टर भी लगाए गए हैं जिनमें नीतीश कुमार के बाद निशांत कुमार को नेतृत्व देने की बात कही गई है।
हालांकि नीतीश कुमार अपनी राजनीति में हमेशा परिवारवाद के विरोधी रहे हैं और उन्होंने कई बार चुनावी मंचों से भी इस मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधा है।
ऐसी स्थिति में अगर निशांत कुमार राज्यसभा पहुंचते हैं तो इसे JDU में नेतृत्व परिवर्तन की संभावित तैयारी के रूप में भी देखा जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार खुद बेटे के राजनीति में आने के पक्ष में नहीं रहे हैं। लेकिन अगर बदले राजनीतिक हालात में वे इसकी अनुमति देते हैं तो यह संकेत हो सकता है कि भविष्य में वे सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया सीमांचल दौरे को भी बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कुछ जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार बंगाल चुनाव के बाद पद छोड़ते हैं तो भाजपा मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश कर सकती है।
JDU के भविष्य की दिशा
अगर निशांत कुमार राज्यसभा जाते हैं तो यह JDU के भविष्य को लेकर भी एक बड़ा संकेत होगा। इससे यह स्पष्ट संदेश जा सकता है कि पार्टी नीतीश कुमार के बाद भी नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगी।
फिलहाल पार्टी में नीतीश कुमार के अलावा ऐसा कोई सर्वमान्य नेता नहीं दिखता जो उनके वोट बैंक—कुर्मी, कोईरी और अति पिछड़ा वर्ग—के सामाजिक समीकरण को संतुलित कर सके।
नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और अशोक चौधरी शामिल हैं, लेकिन इन नेताओं के पास वह सामाजिक आधार नहीं माना जाता जो नीतीश कुमार के पास है।
एक समय रामचंद्र प्रसाद सिंह (RCP सिंह) को भी नीतीश कुमार का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन बाद में उनके और नीतीश कुमार के बीच मतभेद हो गए और वे पार्टी से अलग हो गए।
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पार्टी में नेतृत्व को लेकर पहले भी उठते रहे सवाल
JDU की स्थापना 2003 में हुई थी और पिछले दो दशकों से अधिक समय से पार्टी की राजनीति मुख्य रूप से नीतीश कुमार के नेतृत्व के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।
इस दौरान कई नेता दूसरे नंबर पर उभरते हुए दिखे, लेकिन लंबे समय तक टिक नहीं पाए।
RCP सिंह, प्रशांत किशोर और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं को कभी-कभी पार्टी में मजबूत भूमिका में देखा गया, लेकिन समय के साथ ये सभी अलग हो गए।
पिछले वर्ष पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा का नाम भी संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आया था। वे नालंदा के रहने वाले हैं और उसी कुर्मी समाज से आते हैं जिससे नीतीश कुमार आते हैं।
हालांकि राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने के बाद उनका अभियान अचानक रुक गया और फिलहाल वे पार्टी के प्रमुख निर्णयों से दूर माने जाते हैं।