विनय चौबे को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ मंजूर की जमानत याचिका

Anand Kumar
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Ranchi : शराब घोटाला सहित कई मामलों में आरोपी और जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान करते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे।

जमानत याचिका पर सुनवाई बी. वी. नागरत्ना और उज्जल भुयान की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान चौबे की ओर से दलील दी गई कि इसी मामले में पहले ही दो अन्य आरोपितों—विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह—को जमानत मिल चुकी है, जबकि दोनों को मामले का लाभार्थी बताया गया है।

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चौबे की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि मामला वर्ष 2009-10 का है, जब वे जिले में उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे। इसके बावजूद वह पिछले करीब सात महीने से जेल में हैं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि विनय चौबे अन्य चार मामलों में भी आरोपी हैं, इसलिए उन्हें राहत देने में सावधानी बरतनी चाहिए।

उत्पाद नीति से जुड़ा मामला, ACB ने की थी गिरफ्तारी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव के रूप में कार्यरत विनय चौबे को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उन्होंने उत्पाद नीति 2022 के तहत मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों को कथित रूप से फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर काम करने की अनुमति दी, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।

गिरफ्तारी के बाद से ही चौबे न्यायिक हिरासत में थे। शराब नीति से जुड़े इस मामले में गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में कुल पांच प्राथमिकी दर्ज की गईं।

जमीन और संपत्ति से जुड़े आरोप भी

विनय चौबे के खिलाफ हजारीबाग में जमीन से जुड़े दो मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज है। इनमें एक मामला खास महल जमीन से जुड़ा है, जबकि दूसरा वनभूमि में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोप है कि उपायुक्त रहते हुए उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग कर जमीन अपने करीबी लोगों के नाम कराई।

इसके अलावा, ACB रांची में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया है, जिसकी जांच जारी है। वहीं, पांचवां मामला जगन्नाथपुर थाने में दर्ज किया गया, जिसमें ठगी के आरोप लगाए गए हैं।

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जांच जारी, आगे की कार्रवाई पर नजर

विनय चौबे से जुड़े सभी मामलों में फिलहाल जांच जारी है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी उनके खिलाफ दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, जिस पर आने वाले समय में अहम घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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