नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। वहीं, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च तथा अदालत परिसर में जुटी भीड़ को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी की। सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता।
गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया। अदालत ने राहुल गांधी के आचरण को लेकर भी सवाल उठाए और इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही।
राहुल गांधी के मार्च पर अदालत ने क्या कहा?
12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित गड़बड़ियों के विरोध से जुड़ा था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास बड़ी संख्या में लोगों के जुटने और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होने का मामला सामने आया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को राजनीतिक जुलूस की स्थिति से नहीं जूझना चाहिए था। उनके मुताबिक, करीब 200 वकीलों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
इसी संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को धमका नहीं सकता। अदालत ने राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए।
चुनाव आयोग को नोटिस, SIR पर जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं।
सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग तथा संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा और कहा कि सरकार ने अपने कदम के समर्थन में हलफनामे के जरिए कारण बताए हैं।
SIR और प्रदर्शन पर रोक के मामले अलग-अलग
अदालत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई किए जाने की बात कही गई है। वहीं, प्रदर्शन पर पाबंदियों से संबंधित याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई हो रही है।
इस मामले में दो महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं। पहला, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं पर चुनाव आयोग का जवाब क्या होगा? दूसरा, लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाएगा?
अदालत की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर न्यायपालिका के समक्ष अपनी बात रखने का अधिकार न्यायिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं देता। अब आगे की सुनवाई में चुनाव आयोग का जवाब और राहुल गांधी के आचरण पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा।
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