हेमंत सरकार में अफसरशाही पर मंत्री नाराज, बोले- लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं यह व्यवहार
रांची: झारखंड सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर राज्य के अधिकारियों के कार्य व्यवहार पर गंभीर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए पत्रों का समय पर जवाब नहीं देते, फोन कॉल रिसीव नहीं करते और कई बार मोबाइल तक स्विच ऑफ कर देते हैं। मंत्री ने ऐसे अधिकारियों के रवैये को अहंकारपूर्ण बताते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक करार दिया है।
अपर मुख्य सचिव और विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
इस मुद्दे को लेकर वित्त मंत्री ने मंत्रिमंडल एवं समन्वय विभाग के अपर मुख्य सचिव तथा झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि वर्ष 2021 में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग ने सभी विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों का समयबद्ध उत्तर दिया जाए तथा उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
निर्देशों के बावजूद नहीं हो रहा पालन
मंत्री ने कहा कि इन निर्देशों के बावजूद लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब समय पर नहीं देते। इतना ही नहीं, कई अधिकारी फोन कॉल भी नहीं उठाते और कई मामलों में मोबाइल स्विच ऑफ कर देते हैं। उन्होंने इसे सरकारी व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताया।
यह भी पढ़ें – मानसून सत्र के पहले दिन हंगामा, छह बार स्थगित हुई संसद
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जताई चिंता
राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और संवेदनशील प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में अधिकारियों द्वारा सरकार के निर्देशों की अनदेखी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा होती रही तो विधायिका और कार्यपालिका के बीच दूरी बढ़ेगी, जिसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा।
पुराने आदेशों का भी दिया हवाला
वित्त मंत्री ने अपने पत्र में 18 जनवरी 2021 और 28 जून 2021 को जारी सरकारी निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आदेशों के बावजूद कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों द्वारा मांगी गई सूचनाओं और पत्राचार का समय पर पालन नहीं करते हैं। उन्होंने ‘परिपत्र संग्रह पुस्तिका’ का भी हवाला देते हुए सभी संबंधित दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
सुरक्षा मुद्दे का भी किया उल्लेख
पत्र में मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि हाल के दिनों में उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने के संबंध में भी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद किया था। इसके बावजूद कई अधिकारियों का व्यवहार अपेक्षित नहीं रहा। उन्होंने लिखा कि प्रमुख सचिव स्तर से लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों से फोन पर भी उचित ढंग से संवाद नहीं करते।
सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग
राधाकृष्ण किशोर ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जनप्रतिनिधियों के सम्मान एवं शिष्टाचार से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच विश्वास कमजोर हो सकता है।
यह भी पढ़ें – कॉकरोच जनता पार्टी समर्थकों को पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाया : संसद मार्च में भी लाठीचार्ज, आंसू गैस दागी