फेसबुक लाइव के कुछ घंटे बाद आदिवासी नेत्री निशा भगत का निधन, पुलिस जांच में जुटी

Anand Kumar
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आदिवासी नेत्री निशा भगत की फाइल तस्वीर

रांची: झारखंड की आदिवासी नेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत का शुक्रवार, 6 नवंबर को निधन हो गया। घटना से कुछ घंटे पहले उनका फेसबुक लाइव सामने आया था, जिसमें वह भावुक होकर अपनी परेशानी बता रही थीं और कुछ लोगों के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन को लेकर भी सवाल उठा रही थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लाइव के दौरान उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी से फोन पर संपर्क कर अपनी जान को नुकसान पहुंचाने की बात कही थी। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।

प्रारंभिक खबरों में उनकी मौत को आत्महत्या की आशंका से जोड़ा गया है। हालांकि, घटना की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजहों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच तथा अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएगा। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और संदेशों को भी जांच का हिस्सा बनाए जाने की बात कही गई है।

फेसबुक लाइव में क्या बोली थीं निशा भगत?

रिपोर्टों के मुताबिक, फेसबुक लाइव के दौरान निशा भगत रोती हुई नजर आईं। उन्होंने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कई लोगों पर आरोप लगाए और प्रशासन तथा अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। बताया गया है कि उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर कहा था कि वह अपनी जिंदगी समाप्त करने जैसा कदम उठा सकती हैं। इस बातचीत के बाद क्या कार्रवाई हुई, पुलिस को सूचना कब मिली और मौके पर पहुंचने में कितना समय लगा—इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

लाइव से पहले उनके सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट भी साझा की गई थी। उसमें उन्होंने लिखा था—“मेरी मौत का जिम्मेदार झारखंड पुलिस।” इसी पोस्ट में उन्होंने मिशनरी, पैसे और जमीन से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया था। एक अन्य संदेश में उन्होंने आदिवासी जमीन और अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी थी। ये बातें उनके सोशल मीडिया पोस्ट और लाइव में लगाए गए आरोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दाहूटोली गांव में रहती थीं, अस्पताल ले जाने के बाद हुई मौत

उपलब्ध खबरों के अनुसार, निशा भगत रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र के दाहूटोली गांव में रहती थीं। शुक्रवार को घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। शव को पोस्टमार्टम के लिए रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेजे जाने की जानकारी भी मीडिया रिपोर्टों में दी गई है।

पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां बनी थीं, निशा भगत ने किन लोगों या अधिकारियों से संपर्क किया था और उनके सोशल मीडिया संदेशों में लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई शिकायत या दस्तावेज पहले से मौजूद थे या नहीं। इन सवालों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

जुलाई में भी धमकी मिलने का आरोप लगाकर मांगी थी सुरक्षा

निशा भगत से जुड़ा एक पुराना मामला भी सामने आता है। 13 जुलाई 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जान से मारने की धमकी मिलने और पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगे जाने का आरोप लगाया था। उस समय उन्होंने रांची साइबर थाना में शिकायत देकर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की थी। एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में उन्होंने पहले भी धमकी भरे संदेश मिलने की बात कही थी।

उस समय की खबरों में धमकी देने वाले व्यक्ति के कथित तौर पर एक आपराधिक गिरोह से जुड़े होने का दावा भी दर्ज था, लेकिन उस संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं बताई गई थी। इसलिए पुराने मामले के आरोपों को वर्तमान घटना का कारण मानना उचित नहीं होगा। दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

निशा भगत के फेसबुक लाइव से संबंधित वीडियो का दृश्य
निशा भगत के फेसबुक लाइव से संबंधित दृश्य। स्रोत: दैनिक भास्कर

जमीन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे उठाती थीं

निशा भगत आदिवासी जमीन, धर्म-संस्कृति और समुदाय के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय थीं। जून और जुलाई 2026 में प्रकाशित स्थानीय खबरों में उन्हें आदिवासी अस्मिता, परंपरा और जमीन से जुड़े विषयों पर आवाज उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उल्लेखित किया गया था। अक्टूबर 2026 में मुड़मा जतरा से जुड़े जमीन विवाद के मामले में भी उनके पीड़ित पक्ष से मिलने और निष्पक्ष जांच की मांग करने की खबर प्रकाशित हुई थी।

उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर उनके लाइव और पोस्ट को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, वायरल वीडियो या पोस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति अथवा संस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। मामले में निष्पक्ष जांच, पहले किए गए संपर्कों और शिकायतों की पड़ताल तथा पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होगा।

नोट: इस खबर में आत्महत्या के तरीके या दृश्य का विवरण शामिल नहीं किया गया है। घटना के कारणों और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही मानी जाएगी।

संबंधित रिपोर्टें: जुलाई 2026 में निशा भगत की ओर से धमकी और सुरक्षा की मांग की खबर | धमकी और रंगदारी की शिकायत पर प्रकाशित रिपोर्ट | मुड़मा जतरा जमीन विवाद पर उनकी पहल

यह भी पढ़ें – पटना में पुलिस एनकाउंटर में 3 की मौत, मनेर SHO रजनीश कुमार घायल; पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड से जुड़ा मामला

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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