मरांग बुरु में बकरे की बलि पर विवाद, बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी

Anand Kumar
7 Min Read
मरांग बुरु में बकरे की बलि विवाद को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।

Marang Buru Sacrifice Controversy: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान में बकरे की बलि को लेकर दर्ज प्राथमिकी के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जुलाई 2024 में मुख्यमंत्री के पूजा कार्यक्रम से जुड़े मामले में पांच स्थानीय आदिवासियों को पुलिस परेशान कर रही है। मरांडी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और ग्रामीणों को राहत देने की मांग की है।

रांची: गिरिडीह जिले के मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान में बकरे की बलि को लेकर दर्ज प्राथमिकी अब राजनीतिक विवाद का रूप लेती जा रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पुलिस एवं जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, पीरटांड़ प्रखंड के पांच आदिवासी ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से आवेदन देकर पुलिस की ओर से परेशान किए जाने की शिकायत की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर ग्रामीणों को राहत देने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

पांच आदिवासियों को पुलिस परेशान कर रही: बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया है कि मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी से जुड़े पांच ग्रामीणों साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम ने अपनी शिकायत उनके सामने रखी है।

इन ग्रामीणों का आरोप है कि मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 के आधार पर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। मरांडी ने दावा किया है कि कथित घटना के समय इनमें से दो ग्रामीण मौके पर मौजूद भी नहीं थे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की पूजा से जुड़ा है विवाद

बाबूलाल मरांडी के पत्र के अनुसार, 19 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के साथ मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान पहुंचे थे।

यह पूजा 2024 के गांडेय विधानसभा उपचुनाव में जीत और मुख्यमंत्री के जेल से बाहर आने के बाद मन्नत पूरी होने के अवसर पर आयोजित की गई थी।

मरांडी का कहना है कि इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस बल भी मौजूद थे। आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई थी और इस दौरान नौ बकरे चढ़ाए गए थे। इनमें से एक बकरे की बलि नायके बाबा ने दी थी।

बाबूलाल मरांडी ने पूजा कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें भी जारी की हैं। उनके पत्र में कहा गया है कि पूजा के बाद मुख्यमंत्री और अन्य लोग मुख्य कार्यक्रम स्थल की ओर चले गए थे। इसके बाद वहां तैनात मजिस्ट्रेट को जानकारी मिली कि दिशोम मांझीथान में बकरे की बलि से संबंधित तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

आठ बकरे गायब होने का भी आरोप

बाबूलाल मरांडी ने ग्रामीणों की शिकायत के हवाले से पूजा कार्यक्रम से जुड़ा एक और सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, पूजा की तैयारियों में शामिल प्रखंड विकास पदाधिकारी और उनके सहयोगियों पर शेष आठ बकरे पूजा स्थल से गायब करने का आरोप लगाया गया है।

उन्होंने इस आरोप की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

24 जुलाई 2024 को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, पूजा के दौरान बकरे की बलि से जुड़ी तस्वीरें वायरल होने के बाद 24 जुलाई 2024 को मधुबन थाने में कांड संख्या 13/24 दर्ज की गई थी।

यह प्राथमिकी तत्कालीन प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी दिनेश्वर महतो के आवेदन पर दर्ज हुई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299, 298, 223 और 3(5) लगाई गई थीं।

प्राथमिकी में सम्मेद शिखरजी क्षेत्र में मांस और मदिरा निषेध से संबंधित केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन संख्या 11-584/2014-WL का भी उल्लेख किया गया था।

बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया है कि जब पूजा कार्यक्रम मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित हुआ था, तब इस मामले में स्थानीय आदिवासियों को आरोपी बनाने का आधार क्या है?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बाबूलाल मरांडी की तीन मांगें

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख मांगें की हैं।

  • पांचों आदिवासी ग्रामीणों को राहत मिले: साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम को कथित पुलिसिया प्रताड़ना से राहत दिलाई जाए। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच हो: 19 जुलाई 2024 के पूजा कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों की भूमिका और आठ बकरे गायब होने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
  • पारंपरिक पूजा को लेकर नीति स्पष्ट हो: मरांग बुरु क्षेत्र में संथाल आदिवासी समाज की पारंपरिक पूजा पद्धति और जैन धर्म के पवित्र तीर्थ सम्मेद शिखरजी से जुड़े नियमों को लेकर सरकार स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।

आदिवासी परंपरा और सम्मेद शिखरजी की पवित्रता का सवाल

बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि मरांग बुरु क्षेत्र में आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराओं और सम्मेद शिखरजी की पवित्रता से जुड़े विषय पर सरकार की नीति स्पष्ट होनी चाहिए। इससे दोनों समुदायों के बीच धार्मिक और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलेगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने की अपील की है।

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र के साथ मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी, जिला समिति गिरिडीह का पत्र संख्या 49/2026-27 और मधुबन थाना में दर्ज कांड संख्या 13/24 की प्रति भी संलग्न की है।

यह भी पढ़ें – जमशेदपुर गोलीकांड पर बाबूलाल मरांडी का हमला, पुलिस पदस्थापन और कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

Share This Article
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *