कैरव गांधी अपहरण केस : ‘किडनैपिंग किंग’ चंदन सोनार पर गहराया शक, 12 राज्यों में फैला है क्राइम नेटवर्क

Anand Kumar
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Jamshedpur : जमशेदपुर में हुए हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड ने न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि पूरे औद्योगिक जगत को हिला कर रख दिया है। शहर के प्रतिष्ठित युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस सनसनीखेज वारदात के पीछे देश के कुख्यात अपहरणकर्ता चंदन सोनार की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अपहरण की योजना, तकनीकी तरीके और घटनाक्रम का पैटर्न चंदन सोनार के पुराने मामलों से काफी हद तक मेल खा रहा है। इसी आधार पर जांच की दिशा अब इसी एंगल पर केंद्रित होती जा रही है।


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12 राज्यों में फैला नेटवर्क, 500 करोड़ से अधिक की फिरौती का आरोप

चंदन सोनार कोई साधारण अपराधी नहीं है। अपराध की दुनिया में उसे ‘किडनैपिंग किंग’ के नाम से जाना जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह देश के 12 से अधिक राज्यों में सक्रिय रहा है। उसका मुख्य निशाना बड़े उद्योगपति, कारोबारी घराने और उनके परिवार के सदस्य होते हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, चंदन सोनार पर अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक की फिरौती वसूलने का आरोप है। अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है, हालांकि कई मामलों में वह पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा है।


नाम और हुलिया बदलने में माहिर, पहचान छिपाना है सबसे बड़ी ताकत

चंदन सोनार की सबसे बड़ी ताकत उसकी पहचान छिपाने की कला मानी जाती है। वह वारदात को अंजाम देने के बाद न सिर्फ अपना ठिकाना बदलता है, बल्कि नाम, पहनावा और शारीरिक हुलिया तक बदल लेता है। यही वजह है कि वह लंबे समय तक विभिन्न राज्यों की पुलिस को चकमा देता रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कैरव गांधी के अपहरण में इस्तेमाल किए गए तरीके, संपर्क साधने की शैली और तकनीकी साक्ष्य चंदन सोनार के पुराने मोडस ऑपरेंडी से मेल खाते हैं, जिससे उस पर शक और गहराता जा रहा है।


पुलिस हाई अलर्ट पर, कई राज्यों से समन्वय

मामले की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। झारखंड पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो इस केस से जुड़े हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं।

पुलिस बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्यों की पुलिस से संपर्क कर चंदन सोनार के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। साथ ही कॉल डंप डेटा, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के जरिए अपराधियों के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।


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उद्योग जगत में दहशत, सुरक्षा बढ़ाने पर मजबूर उद्यमी

कैरव गांधी के अपहरण के बाद जमशेदपुर के उद्योग और व्यापारिक जगत में गहरा रोष और डर का माहौल है। शहर के प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन से कैरव गांधी की शीघ्र और सुरक्षित बरामदगी की मांग की है।

डर का आलम यह है कि कई बड़े उद्योगपतियों ने अपने निजी अंगरक्षकों की संख्या बढ़ा दी है, जबकि परिवार के सदस्यों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ, तो इसका असर औद्योगिक निवेश और कारोबारी माहौल पर भी पड़ सकता है।


सुरक्षित बरामदगी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कैरव गांधी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना और इस अपहरण कांड के पीछे शामिल पूरे नेटवर्क को बेनकाब करना है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं और आने वाले दिनों में मामले में बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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