रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहा छात्रों का आंदोलन शनिवार को और तीखा हो गया। आंदोलनकारी छात्रों ने प्रेस वार्ता कर झारखंड सरकार पर आंदोलन को कमजोर और विभाजित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। छात्रों ने साफ किया कि लिखित आश्वासन या आधिकारिक आदेश मिलने तक आंदोलन स्थगित नहीं किया जाएगा।
- पहली वार्ता के बाद दूसरे छात्र संगठनों से संवाद पर सवाल
- ‘आंदोलन को दो-तीन हिस्सों में बांटने की कोशिश’
- NSUI और JMM छात्र मोर्चा से ज्ञापन लेने पर भी सवाल
- सरकार ने कहा—सभी सुझाव मुख्यमंत्री तक पहुंचाए जाएंगे
- आंदोलनकारी छात्रों ने कहा—‘लिखित आदेश के बिना आंदोलन नहीं रुकेगा’
- भूख हड़ताल पर तीन छात्र, एक की हालत गंभीर
- 10 अगस्त को विधानसभा मार्च, 50 हजार छात्रों के जुटने का दावा
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JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के छात्र नेता रवींद्र कुमार ने कहा कि शुक्रवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई पहली वार्ता के बाद अब तक दूसरी वार्ता के लिए उन्हें सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि छात्रों को मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन या आधिकारिक नोटिस चाहिए।
“दूसरी वार्ता के लिए सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं आया है। हम लोग मौखिक नहीं, लिखित आश्वासन या ऑफिशियल नोटिस चाहते हैं। हमारी सभी मांगों को मान लिया जाता है तो निश्चित रूप से आंदोलन स्थगित कर देंगे। लेकिन सरकार ऐसी कोशिश या पहल करती हुई दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। सरकार इस आंदोलन को फ्लॉप करने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन हम अपनी मांगों पर अडिग हैं।” — रवींद्र कुमार, छात्र नेता, JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच
पहली वार्ता के बाद दूसरे छात्र संगठनों से संवाद पर सवाल
आंदोलनकारी छात्रों के मुताबिक, शुक्रवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई पहली वार्ता में उन्होंने अपनी मांगों को विस्तार से सरकार के सामने रखा था। छात्रों ने कथित अनियमितताओं वाली परीक्षाओं को रद्द करने, पूरे मामले की जांच CBI और ED से कराने तथा भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग रखी।
छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने उनकी मांगों को सुना और उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की बात कही थी। साथ ही छात्रों को दूसरी वार्ता के लिए बुलाने का भरोसा दिया गया था।
लेकिन शनिवार को अलग-अलग छात्र संगठनों से ज्ञापन लिए जाने के बाद आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी बढ़ गई।
छात्रों का सवाल है कि जब वे पिछले 15 दिनों से एक मंच के तहत आंदोलन कर रहे हैं और सरकार के सामने अपनी मांगें तथा उनका पूरा पक्ष रख चुके हैं, तो वार्ता के अगले ही दिन अलग-अलग संगठनों से ज्ञापन लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
‘आंदोलन को दो-तीन हिस्सों में बांटने की कोशिश’
आंदोलनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि अलग-अलग छात्र संगठनों से ज्ञापन लेने की प्रक्रिया के जरिए आंदोलन को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की कोशिश की जा रही है।
उनका कहना है कि इससे यह संदेश देने का प्रयास हो सकता है कि झारखंड के छात्र अलग-अलग मांगों और अलग-अलग संगठनों के साथ खड़े हैं, जबकि आंदोलनकारी छात्रों के अनुसार JPSC-JSSC सुधार और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र एकजुट हैं।
छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखने के लिए उन्होंने विभिन्न राजनीतिक संगठनों से दूरी बनाकर JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले आंदोलन शुरू किया है।
NSUI और JMM छात्र मोर्चा से ज्ञापन लेने पर भी सवाल
छात्रों ने सरकार द्वारा NSUI, यूथ कांग्रेस और झारखंड छात्र मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों से संवाद किए जाने पर भी सवाल उठाए।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यदि ये संगठन भी छात्रों की मांगों को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें आंदोलन स्थल पर आकर छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए।
छात्र नेताओं ने सरकार से पूछा कि जो संगठन पिछले कई दिनों से चल रहे धरने में दिखाई नहीं दे रहे थे, उनसे आंदोलन के बीच ज्ञापन लेने का उद्देश्य क्या है?
हालांकि सरकार की ओर से इस पूरी प्रक्रिया को अलग नजरिए से पेश किया गया है। सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि शनिवार को NSUI, यूथ कांग्रेस, झारखंड छात्र मोर्चा और ACS आदिवासी हॉस्टल सहित विभिन्न छात्र संगठनों से सकारात्मक संवाद हुआ।
सरकार ने कहा—सभी सुझाव मुख्यमंत्री तक पहुंचाए जाएंगे
मंत्री दीपिका पांडेय के मुताबिक, सरकार ने छात्रों की बात गंभीरता से सुनी है और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों और चिंताओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा।
सरकार की ओर से छात्रों, अभिभावकों, अभ्यर्थियों, शिक्षाविदों, वकीलों और सिविल सोसाइटी सहित सभी स्टेकहोल्डर्स से ई-मेल के माध्यम से सुझाव भी मांगे गए हैं।
सरकार का कहना है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान करती है और छात्रों की मांगों के समाधान को लेकर गंभीर है। सरकार के मुताबिक संवाद, जांच और सुधार के रास्ते से समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।
आंदोलनकारी छात्रों ने कहा—‘लिखित आदेश के बिना आंदोलन नहीं रुकेगा’
छात्र नेता रवींद्र कुमार ने कहा कि आंदोलन को समाप्त करने का फैसला सिर्फ मौखिक आश्वासन के आधार पर नहीं लिया जाएगा।
उनके मुताबिक, सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय देना होगा। इसके बाद ही आंदोलन स्थगित करने पर विचार किया जाएगा।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता।
भूख हड़ताल पर तीन छात्र, एक की हालत गंभीर
आंदोलनकारी छात्रों ने यह भी दावा किया कि आंदोलन के दौरान उनके साथी राहुल की तबीयत बिगड़ने के बाद वह सदर अस्पताल में इलाजरत हैं। वहीं तीन छात्र अब भी भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
छात्र नेताओं ने कहा कि यदि भूख हड़ताल पर बैठे किसी छात्र की तबीयत बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्र सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों और युवाओं के भविष्य को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
10 अगस्त को विधानसभा मार्च, 50 हजार छात्रों के जुटने का दावा
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च और घेराव का कार्यक्रम वापस लेने से इनकार कर दिया है।
आंदोलनकारी छात्रों ने दावा किया है कि 10 अगस्त को झारखंड के अलग-अलग जिलों से करीब 50 हजार छात्र रांची पहुंचेंगे। छात्रों के मुताबिक यह आंदोलन का निर्णायक चरण होगा।
छात्रों ने कहा कि विधानसभा मार्च से पहले सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से दोबारा वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है।
अब आमने-सामने सरकार और आंदोलनकारी छात्र
एक तरफ आंदोलनकारी छात्र लिखित आश्वासन और आधिकारिक निर्णय की मांग पर अड़े हैं, वहीं सरकार विभिन्न छात्र संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात कह रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बीच दूसरी दौर की वार्ता होगी? क्या सरकार छात्रों की मांगों पर लिखित आश्वासन देगी? और क्या 10 अगस्त का प्रस्तावित विधानसभा मार्च टल पाएगा?
फिलहाल दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि आने वाले 24 घंटे झारखंड के इस छात्र आंदोलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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