रांची। झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। एक ओर विभिन्न छात्र संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है, वहीं दूसरी ओर CID की जांच में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच की आंच पूर्व अधिकारियों तक पहुंच गई है।
29 जुलाई को विशाल पदयात्रा, 30 जुलाई को लोकभवन मार्च
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि 29 जुलाई को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी। इसमें राज्यभर के प्रतियोगी छात्र शामिल होंगे और भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
इसके अगले दिन 30 जुलाई को युवा आजसू और अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू छात्र संघ) की ओर से लोकभवन तक विशाल मार्च निकाला जाएगा। संगठनों का कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
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6 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान
छात्र संगठनों ने घोषणा की है कि झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन 6 अगस्त को विधानसभा घेराव किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के राजधानी रांची पहुंचने की संभावना है।
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CID का एक्शन फुल मोड में, कई गिरफ्तार
इधर, चौथी JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक करीब दस लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित कई आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी का मानना है कि अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

अभय तिवारी को माना जा रहा मुख्य सूत्रधार
CID की जांच में TDPL (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को पूरे कथित परीक्षा घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अभय तिवारी ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को संचालित करने के लिए एक होटल को पूरे वर्ष के लिए लीज पर ले रखा था, जहां से पूरे नेटवर्क का संचालन होता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर वह केवल आर्थिक लाभ के लिए ही नहीं, बल्कि अपने करीबी लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए भी इस नेटवर्क का इस्तेमाल करता था।
पत्नी सुष्मा पांडेय पर भी सवाल
जांच के दौरान अभय तिवारी की पत्नी सुष्मा पांडेय का नाम भी चर्चा में आया है। बताया जा रहा है कि वह JSSC CGL परीक्षा के माध्यम से असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) पद पर चयनित हुई थीं और वर्तमान में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (निगरानी प्रभाग) में कार्यरत हैं।
सूत्रों के अनुसार, CID की जांच तेज होने के बाद से वह लंबी छुट्टी पर चली गई हैं। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
श्वेता गुप्ता के बयान से पूर्व चेयरमैन पर जांच की आंच
CID की पूछताछ में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL के अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
सूत्रों के अनुसार, श्वेता गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और प्रक्रियाओं की जानकारी तत्कालीन JPSC चेयरमैन एल. ख्यांगते को थी। उन्होंने यह भी कहा कि OMR शीट में गड़बड़ी की शिकायत भी उनके संज्ञान में लाई गई थी तथा परीक्षा प्रक्रिया में कई बदलाव उनके निर्देश पर किए गए।
इन्हीं बयानों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर CID ने एल. ख्यांगते को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए तलब किया है।
पहले हो चुकी है छापेमारी
इससे पहले CID की टीम एल. ख्यांगते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास और JPSC कार्यालय में उनके कक्ष पर छापेमारी कर चुकी है। करीब पांच घंटे चली कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेजों की जांच की गई।
इसके साथ ही TDPL कार्यालय में भी तलाशी अभियान चलाया गया, जहां से परीक्षा संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए गए।
CID ने JPSC कार्यालय से भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज, OMR शीट और डिजिटल साक्ष्य भी अपने कब्जे में लिए हैं।
‘हिनू ग्रुप’ और उमाकांत की तलाश
सूत्रों के अनुसार, CID की जांच अब कथित ‘हिनू ग्रुप’ और उसके प्रमुख एजेंट उमाकांत तक पहुंच गई है।
बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों की व्यवस्था करता था। उम्मीदवारों से मूल प्रमाण पत्र, चेक और अन्य दस्तावेज लेकर कथित रूप से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जाता था।
सूत्रों का दावा है कि कोकर निवासी उमाकांत बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को अभय तिवारी तक पहुंचाता था और कथित तौर पर पहले से मोटी रकम देकर सीटें सुरक्षित कराता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सचिन कुमार, सुमित तिवारी, राहुल कुमार (डेहरी), दीपक यादव और अन्य कई लोग भी इस कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल इनमें से कई लोग भूमिगत बताए जा रहे हैं। यदि CID इन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लेती है तो मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।