
रांची: झारखंड के वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे ने निलंबन से मुक्त होने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग में योगदान दे दिया है। राज्य सरकार ने उन्हें निलंबन से मुक्त किया था, जिसके बाद उन्होंने विभाग में योगदान किया।
विनय चौबे को शराब घोटाले में ACB की गिरफ्तारी के बाद निलंबित किया गया था। उनकी गिरफ्तारी पर आरोप था कि उन्होंने मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों के साथ कथित साजिश के जरिए सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। इसके बाद उनके खिलाफ दो और मामले दर्ज किए गए।
शराब घोटाले के बाद जमीन से जुड़े मामले भी दर्ज
विनय चौबे के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में उन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर करीबी लोगों के नाम पर कथित तौर पर गलत तरीके से म्यूटेशन कराने के आरोप हैं। इन मामलों में अदालत से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे।
वहीं, हजारीबाग में जमीन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में उन्हें नियमित जमानत दी थी। अदालत ने जांच पूरी होने, चार्जशीट दाखिल होने और एक सह-आरोपी को जमानत मिलने समेत अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखा था।
अब कार्मिक विभाग में योगदान
निलंबन खत्म होने के बाद विनय चौबे ने कार्मिक विभाग में योगदान किया है। हालांकि, योगदान के बाद उन्हें फिलहाल कौन-सा नया दायित्व दिया जाएगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। झारखंड सरकार का कार्मिक विभाग ही राज्य के IAS अधिकारियों से संबंधित सेवा मामलों का प्रमुख विभाग है।
विनय चौबे 1999 बैच के IAS अधिकारी हैं। जून 2026 की झारखंड IAS ग्रेडेशन सूची में भी उनका उल्लेख हुआ था।
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