झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित धांधली को लेकर जांच कर रही सीआईडी ने कई चौकाने वाले खुलासे कर दिए हैं। जांच में परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने एवं चयन दिलाने के नाम पर बड़े पैमानों पर पैसों के लेनदेन एवं एक संगठित सिंडिकेट के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है।
जांच से जुड़े खुलासों के मुताबिक, जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी में अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए करीब पांच लाख रुपये तक की मांग की जाती थी, जिसे फाइनल चयन कराने के नाम पर यह रकम बढ़कर 25 लाख रुपये तक भी पहुंच जाती थी। इस पूरे खेल में एक संगठित नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क करने एवं रकम वसूलने के आरोप सामने आ रहे हैं। सीआईडी की जांच में अभय तिवारी समेत कई लोगों के नाम सामने आए, जिसमें आरोप है कि सिंडिकेट परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर संपर्क एवं लेनदेन का इस्तेमाल किया जाता था।
मामले में ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़ एवं परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों की भी जांच की जा रही है। वहीं, जांच में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष पर भी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश किए जाने का आरोप सामने आया है, जिसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर आपत्ति जताने वाले एक अधिकारी को पद से भी हटाए जाने की बात सामने आई है।