Gen-Z बनाम शराब उद्योग : क्यों डूब रहा है 830 अरब डॉलर का बाजार, बड़े ब्रांड्स पर असर
Research Desk : वैश्विक शराब उद्योग बीते चार वर्षों में अभूतपूर्व संकट से गुज़रा है। प्रमुख वैश्विक ब्रांड्स और शराब कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में $830 अरब (करीब ₹66 लाख करोड़) से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़े नुकसान की सबसे बड़ी वजह Gen-Z की शराब के प्रति घटती रुचि है, जो पिछली पीढ़ियों की तुलना में काफी कम शराब का सेवन कर रही है।Forbes में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, युवा पीढ़ी के पीने के व्यवहार में आए इस बदलाव ने बीयर, वाइन और स्पिरिट्स सेक्टर की दिग्गज कंपनियों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और कई शराब कंपनियों के शेयर लगातार दबाव में हैं।
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Gen-Z की आदतों ने बदली तस्वीर
रिपोर्ट के अनुसार, Gen-Z (1997 के बाद जन्मी पीढ़ी) शराब पीने के मामले में मिलेनियल्स और उनसे पहले की पीढ़ियों से बिल्कुल अलग रुख अपना रही है। यह पीढ़ी स्वास्थ्य, फिटनेस और मानसिक संतुलन को प्राथमिकता दे रही है, जिसके चलते शराब का सेवन सीमित या पूरी तरह छोड़ने का चलन बढ़ा है।
डेटा बताता है कि
• Gen-Z में नियमित शराब पीने वालों की संख्या पिछली पीढ़ियों के मुकाबले काफी कम है।
• “सोबर क्यूरियस” जैसे ट्रेंड तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
• युवा वर्ग कम-अल्कोहल या नॉन-अल्कोहल विकल्पों की ओर रुख कर रहा है।
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बड़े ब्रांड्स पर सीधा असर
शराब की मांग में आई इस गिरावट का असर उत्पादन स्तर तक दिखाई देने लगा है। दुनिया के प्रमुख व्हिस्की ब्रांड्स में शामिल Jim Beam को भी मांग में कमी के चलते उत्पादन रोकने जैसे फैसले लेने पड़े हैं। इसे उद्योग के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अस्थायी गिरावट नहीं, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार में आया एक संरचनात्मक बदलाव है, जिसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
निवेशकों और उद्योग के लिए संकेत
विश्लेषकों के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में शराब उद्योग को अपने उत्पाद, मार्केटिंग और ब्रांड रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। खासतौर पर युवा उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए कंपनियां अब वैकल्पिक ड्रिंक्स और कम-अल्कोहल श्रेणी पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
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