झारखंड की जनता राजनीतिक चक्रव्यूह और साजिशों को समझने लगी है : मुख्यमंत्री

Anand Kumar
4 Min Read
दुमका में झामुमो के स्थापना दिवस पर गुरुजी को नमन करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।

भावुक माहौल में मना झामुमो का 47वां स्थापना दिवस, बोले हेमंत सोरेन—आज बाबा बहुत याद आ रहे हैं

Dumka : झारखंड मुक्ति मोर्चा का 47वां स्थापना दिवस गुरुवार को दुमका में भावुक वातावरण के बीच मनाया गया। यह पहला अवसर था, जब पार्टी का स्थापना दिवस दिशोम गुरु शिबू सोरेन की गैरमौजूदगी में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में शामिल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंच से अपने पिता और पार्टी के संस्थापक को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “आज बाबा बहुत याद आ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज झामुमो परिवार स्थापना दिवस पर उपस्थित तो है, लेकिन इतिहास का वह पन्ना भी सामने है, जब जिन दिशोम गुरु ने राह दिखाई, वे आज हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को गर्व है कि वह ऐसे वीर सपूतों की विरासत को आगे बढ़ा रही है, जिनके दिखाए मार्ग और विचारों के सहारे आज जनमानस के बीच काम किया जा रहा है।


एकजुटता ही झामुमो की ताकत: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु के आशीर्वाद से राज्य के गरीब-गुरबा, आदिवासी-मूलवासी और समाज की आधी आबादी के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि झारखंड के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विरोधी झामुमो को कमजोर समझते रहे, लेकिन उनकी चालों और षड्यंत्रों को समय रहते ध्वस्त कर दिया गया। अब झारखंड की जनता राजनीतिक चक्रव्यूह और साजिशों को समझने लगी है।


नगर निकाय चुनाव का जिक्र, कार्यकर्ताओं को किया नमन

मुख्यमंत्री ने आने वाले नगर निकाय चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे राज्य में उत्साह का माहौल है। उन्होंने ठंड में भी मैदान में जुटे बुजुर्गों, माताओं-बहनों और कार्यकर्ताओं को नमन और जोहार किया।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की एकजुटता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत को कमजोर नहीं होने देने का संकल्प स्थापना दिवस पर लिया जाना चाहिए।


शिक्षा और भविष्य पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपील की कि सभी कार्यकर्ता संकल्प लें कि अपने बच्चों को पढ़ाएंगे, लिखाएंगे और काबिल बनाएंगे, ताकि वे राज्य, गांव और समाज का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के आशीर्वाद से ही सरकार झारखंड के लोगों के लिए काम कर पा रही है।


असम के आदिवासियों की लड़ाई में झारखंड साथ

मुख्यमंत्री ने अपने हालिया असम दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान झारखंड और ओडिशा से आदिवासियों को जबरन असम के चाय बागानों में ले जाया गया था। आज भी वहां रहने वाले आदिवासी अपनी पहचान और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही देश में आदिवासियों की दो तरह की पहचान कैसे हो सकती है, जबकि आदिवासी इस देश के मूलवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि असम में आदिवासियों पर सरकारी स्तर पर यातनाएं दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज उनकी इस लड़ाई में साथ खड़ा है और जरूरत पड़ी तो पूरे झारखंड के आदिवासी असम जाकर समर्थन देंगे।


शहीदों की कुर्बानी भूलना बुरे दिन की शुरुआत

मुख्यमंत्री ने संघर्ष यात्रा के दौरान सरेंगसिया के शहीदों को नमन करने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसी धरती से लोगों के साथ मिलकर सत्ता तक का रास्ता तय हुआ। यह स्थल संघर्ष और आंदोलन की प्रेरणा देता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जिस दिन आंदोलनकारियों और शहीदों की कुर्बानी को भुला दिया गया, उसी दिन बुरे दिनों की शुरुआत हो जाएगी।

कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न कोनों से पहुंचे कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मुख्यमंत्री ने आभार जताया और कहा कि यही गौरवपूर्ण इतिहास झारखंड मुक्ति मोर्चा की असली ताकत है।

Share This Article
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *