झारखंड के इन 5 शहरों में रहते हैं तो कल के मॉक ड्रिल के लिए हो जायें तैयार, युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी

Anand Kumar
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Ranchi : पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश का माहौल है। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में तनाव गहरा गया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने देश के 244 जिलों में 7 मई को मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से आम नागरिकों को आपात स्थिति में स्वयं को सुरक्षित रखने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

इपहलगाम में हुआ यह वीभत्स आतंकी हमला न केवल इंसानियत को शर्मसार करने वाला था, बल्कि देशभर में सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर गया। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया—देश के 244 जिलों में एक साथ 7 मई को युद्ध जैसी मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

इस राष्ट्रीय अभ्यास का बड़ा फोकस बना है झारखंड, जहां हालात सामान्य जरूर दिख रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक हलचलें कुछ और ही संकेत दे रही हैं। राज्य के रांची, जमशेदपुर, बोकारो, साहिबगंज और गोड्डा जैसे जिलों में इस दिन आम नागरिकों को युद्ध या आतंकी हमले जैसी परिस्थितियों से निपटने की लाइव ट्रेनिंग दी जाएगी।

क्यों खास हैं रांची, जमशेदपुर, बोकारो और साहिबगंज?

  • रांची, राज्य की राजधानी होने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से सबसे अधिक संवेदनशील है। यहां राज्य सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, और प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के मुख्यालय स्थित हैं। यदि राजधानी ठप होती है, तो पूरे राज्य की गतिविधियां थम सकती हैं।
  • जमशेदपुर, देश के सबसे बड़े औद्योगिक शहरों में से एक है। यहां टाटा स्टील और अन्य भारी उद्योग हैं, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। किसी भी हमले की स्थिति में यह शहर आतंकियों का प्राथमिक निशाना हो सकता है।
  • बोकारो, इस्पात उद्योग का केंद्र है। साथ ही गोमिया क्षेत्र में बारूद फैक्ट्री की उपस्थिति इसे रणनीतिक रूप से अति संवेदनशील बनाती है। इसीलिए गोमिया में अलग से विशेष मॉक ड्रिल की योजना बनाई गई है, जिसमें अत्यधिक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।
  • साहिबगंज, गंगा नदी के किनारे बसा एक सीमावर्ती जिला है, जो झारखंड-बिहार सीमा के साथ-साथ बंगाल की सीमा से भी जुड़ा हुआ है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में घुसपैठ और अवैध गतिविधियों की खबरें भी आई हैं, जिससे इसे सुरक्षा दृष्टिकोण से प्राथमिकता में रखा गया है।

क्या होती है मॉक ड्रिल?

मॉक ड्रिल यानी एक पूर्व नियोजित आपातकालीन अभ्यास। इसका मकसद होता है यह परखना कि अगर अचानक हवाई हमला, बम धमाका, या किसी प्रकार का सैन्य संकट हो जाए, तो प्रशासन और आम जनता कितनी तत्परता और संयम के साथ प्रतिक्रिया देते हैं। इसमें अलर्ट सायरन, सुरक्षित स्थानों पर निकासी, प्राथमिक चिकित्सा, और संचार व्यवस्था की टेस्टिंग शामिल होती है।

ब्लैकआउट एक्सरसाइज क्या है?

ब्लैकआउट एक्सरसाइज के अंतर्गत एक तय समय के लिए पूरे इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है। यह अभ्यास इसलिए किया जाता है ताकि हवाई हमले की स्थिति में दुश्मन को टारगेट साधने में कठिनाई हो। यह रणनीति पहले 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी अपनाई गई थी।

प्रशासन से लेकर आम नागरिक तक तैयार

रांची से लेकर गोमिया तक, झारखंड के जिलों में पुलिस, NDRF, सिविल डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटे हैं। कहीं अफसर खुद मॉक ड्रिल की स्क्रिप्ट तैयार कर रहे हैं, तो कहीं स्कूलों, कॉलेजों और बाजारों में जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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